रबी विपणन वर्ष 2026-27: तूर, चना, मसूर व सरसों की खरीद लक्ष्य जारी, 7 अप्रैल से शुरू होगी खरीद

लखनऊ, 01 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए तूर (अरहर), चना, मसूर एवं लाही-सरसों की खरीद के लक्ष्य और दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत इन फसलों की खरीद 7 अप्रैल 2026 से शुरू होगी।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही की अध्यक्षता में कृषि भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने अपनी फार्मर रजिस्ट्री पूरी कर ली है। किसानों से जल्द रजिस्ट्रेशन कराने की अपील भी की गई है।

नेफेड और एनसीसीएफ के बीच 80:20 में लक्ष्य विभाजन
केंद्र सरकार की एजेंसियों के बीच खरीद लक्ष्य 80:20 के अनुपात में बांटे गए हैं।

  • नेफेड को 80%
  • एनसीसीएफ को 20%

नेफेड को 55 जिलों में खरीद की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि एनसीसीएफ 20 जिलों में खरीद करेगा।

फसलवार कुल खरीद लक्ष्य (मीट्रिक टन में)

  • तूर (अरहर): 1,13,780
  • चना: 2,24,000
  • मसूर: 6,77,000
  • लाही-सरसों: 5,30,000

इनमें से नेफेड और एनसीसीएफ को अलग-अलग लक्ष्य आवंटित किए गए हैं, जिससे पूरे प्रदेश में संतुलित खरीद सुनिश्चित की जा सके।

राज्य एजेंसियों को भी जिम्मेदारी
राज्य स्तरीय एजेंसियों के बीच भी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं—

  • यूपीपीसीयू को 40%
  • यूपीपीसीएफ को 20%
  • जैफेड और यूपीएसएस को 15-15%
  • हॉफेड को 10%

इन एजेंसियों द्वारा जिलावार क्रय केंद्र स्थापित कर खरीद प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित किया जाएगा।

कड़ी निगरानी में होगा क्रय कार्य
शासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी एजेंसियां निर्धारित जिलों में ही खरीद सुनिश्चित करें और पीएसएस गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करें। जिलाधिकारियों की अनुमति से क्रय केंद्र खोले जाएंगे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी शासन स्तर से की जाएगी।

केंद्रीय बैठक में भी हुई चर्चा
बैठक से पहले सूर्य प्रताप शाही ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया। इसमें फार्मर आईडी, उर्वरक उपयोग, विकसित कृषि संकल्प अभियान-2026 और रबी खरीद रणनीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

सरकार की इस पहल से किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित होगा और उन्हें बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, पारदर्शी खरीद व्यवस्था से कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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