लखनऊ, 29 मार्च 2026 (यूएनएस)। लखनऊ नगर निगम अब अमौसी एयरपोर्ट के आसपास लगे कॉमर्शियल होर्डिंग्स से लंबित विज्ञापन शुल्क की वसूली की तैयारी में जुट गया है। पिछले तीन वर्षों में इन होर्डिंग्स से शुल्क न वसूल पाने के कारण नगर निगम को करीब 45 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
नई विज्ञापन गाइडलाइन लागू होने के बाद नगर निगम ने राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से इस दिशा में सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा है कि ग्राउंड पर लगे सभी होर्डिंग्स की जांच कर जिम्मेदार पक्षों से जल्द से जल्द वसूली सुनिश्चित की जाए।
इस संबंध में हाल ही में एक बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें नगर आयुक्त ने अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव को निर्देशित किया कि एयरपोर्ट क्षेत्र में लगे होर्डिंग्स का सर्वे कर उनकी वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाए। बताया जा रहा है कि नगर निगम की ओर से फिलहाल एयरपोर्ट के पास 13 होर्डिंग्स चिन्हित किए गए हैं, जिनसे बीते तीन वर्षों से कोई शुल्क वसूला नहीं गया है।
वहीं, एयरपोर्ट के आसपास छतों पर और लाइटयुक्त होर्डिंग्स लगाने की अनुमति नहीं है। इसके लिए विमानपत्तन प्राधिकरण से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेना अनिवार्य होता है। हाल ही में एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से भेजे गए पत्र में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए होर्डिंग्स को लेकर चिंता भी जताई गई थी। इसके बाद से अधिकारी ऐसे होर्डिंग्स को अनुमति देने से बच रहे हैं।
हालांकि, नगर निगम का दावा है कि नियमों के तहत कुछ होर्डिंग्स को अनुमति दी जा सकती है, जिससे निगम की आय में बढ़ोतरी होगी।
उधर, आउटडोर एडवरटाइजिंग एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य अभिषेक चंद्रा ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले निजी जमीन पर यूनिपोल लगाने के लिए निगम को सूचना दी जाती थी और उसे डिमांड में शामिल कर लिया जाता था, लेकिन अब हर साल डिमांड बनाकर उसे निरस्त कर दिया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई विज्ञापनदाताओं द्वारा शुल्क जमा करने के बावजूद उसे अन्य होर्डिंग्स में समायोजित कर दिया गया। जब इस बारे में निगम से पूछा गया तो जवाब मिला कि एयरपोर्ट प्रशासन से एनओसी नहीं ली गई थी। इस पर अभिषेक चंद्रा का कहना है कि एनओसी केवल रूफटॉप और लाइट वाले होर्डिंग्स के लिए आवश्यक होती है, सामान्य ग्राउंड होर्डिंग्स के लिए नहीं।
उन्होंने कहा कि यदि नियमानुसार अनुमति दी जाए तो न केवल विज्ञापनदाताओं को राहत मिलेगी, बल्कि नगर निगम को भी लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
