नई दिल्ली, 15 फरवरी। नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय उद्योग जगत से साहसपूर्वक निवेश बढ़ाने और नवाचार-आधारित वृद्धि को गति देने के आह्वान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई)-भाषा को दिए साक्षात्कार को “सुनियोजित और हताशा भरी जनसंपर्क कवायद” बताते हुए इसकी आलोचना की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने साक्षात्कार में कहा कि भारत के विकास की अगली छलांग के लिए निजी क्षेत्र की निर्णायक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पूंजीगत व्यय को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो बुनियादी ढांचे के विस्तार, लॉजिस्टिक्स सुदृढ़ीकरण और उभरते क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन देने की रणनीति का हिस्सा है। उनके अनुसार रेलवे, सड़क, डिजिटल और ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ा खर्च रोजगार सृजन और आर्थिक गति को नई दिशा देगा।
प्रधानमंत्री ने उद्योगों से अनुसंधान एवं विकास में अधिक निवेश करने, नई प्रौद्योगिकियां अपनाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा प्रोत्साहनों पर नहीं, बल्कि नवाचार, उत्पादकता और दक्षता पर आधारित होनी चाहिए। साथ ही, उत्पादकता वृद्धि के लाभ कर्मचारियों, निवेशकों और प्रबंधन के बीच न्यायसंगत रूप से साझा करने पर उन्होंने जोर दिया, ताकि आर्थिक वृद्धि सामाजिक रूप से स्वीकार्य और टिकाऊ बन सके।
हालांकि, कांग्रेस ने इन दावों को खारिज करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का साक्षात्कार वास्तविक संवाद नहीं था, बल्कि पूर्वनियोजित संदेश था। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट को लेकर आलोचनाओं और बाजारों की नकारात्मक प्रतिक्रिया के बीच यह साक्षात्कार सामने आया।
रमेश ने यह भी दावा किया कि सरकार किसानों और अन्य वर्गों से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री के बयान “संक्षिप्त नारे” तक सीमित हैं और आर्थिक चुनौतियों का ठोस समाधान प्रस्तुत नहीं करते।
इस बीच, सरकार ने अपने बजट और नीतिगत दिशा का बचाव करते हुए कहा है कि उसका दृष्टिकोण दीर्घकालिक विकास, अवसंरचना निर्माण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में भारत की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि उद्योग जगत नवाचार और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण को कितनी प्राथमिकता देता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आर्थिक नीतियों और निजी निवेश की भूमिका को लेकर बहस आने वाले समय में और तेज होने के संकेत हैं।
