नयी दिल्ली, 28 मार्च (UNS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को सऊदी अरब के युवराज और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और क्षेत्रीय स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान दोनों नेताओं ने समुद्री परिवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और प्रमुख जहाजरानी मार्गों को सुरक्षित एवं खुला रखने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय ऊर्जा अवसंरचना पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हुए भारत की चिंता दोहराई। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के मद्देनजर दोनों पक्षों के बीच रचनात्मक संवाद हुआ।
प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब में रह रहे भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए वहां की सरकार द्वारा दिए जा रहे निरंतर सहयोग के लिए युवराज मोहम्मद बिन सलमान का आभार भी व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद यह दोनों नेताओं के बीच दूसरी टेलीफोन वार्ता है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने अपने पड़ोसी देशों और इजराइल को निशाना बनाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के नियंत्रण वाले होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा इसी मार्ग से परिवहन होती है। हालिया संघर्ष के बाद ईरान द्वारा सीमित संख्या में जहाजों को ही इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कई अन्य वैश्विक नेताओं से भी संवाद किया है, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ईरान, फ्रांस, इजराइल और मलेशिया के प्रमुख नेता शामिल हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी क्षेत्र में सैन्य अभियान के बाद प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत की थी। उस बातचीत के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का उपयोगी आदान-प्रदान हुआ।
