कांशीराम को भारत रत्न देने के कांग्रेस प्रस्ताव पर मायावती ने उठाए सवाल

लखनऊ, 14 मार्च (RNN)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने शनिवार को कांग्रेस के उस प्रस्ताव पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया है कि यदि पार्टी केंद्र में सत्ता में आती है तो बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा।

मायावती ने देशभर के पार्टी कार्यकर्ताओं से अन्य राजनीतिक दलों, विशेषकर कांग्रेस द्वारा बसपा को कमजोर करने के प्रयासों के प्रति सतर्क रहने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि केंद्र में कई वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर को उचित सम्मान नहीं दिया। ऐसे में अब कांशीराम को भारत रत्न देने की बात करना सवाल खड़े करता है। कांशीराम की जयंती रविवार को मनाई जाएगी।

मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “कांग्रेस ने दलितों के मसीहा और संविधान के प्रमुख निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित नहीं किया। ऐसे में वही पार्टी अब कांशीराम को कैसे सम्मानित कर सकती है?”

उनकी यह टिप्पणी लखनऊ में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘संविधान सम्मेलन’ में पारित उस प्रस्ताव के एक दिन बाद आई है, जिसमें सत्ता में आने पर कांशीराम को भारत रत्न देने की बात कही गई थी। इस सम्मेलन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए थे।

मायावती ने आरोप लगाया कि केंद्र में सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने कांशीराम के निधन पर एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उस समय की समाजवादी पार्टी सरकार ने भी राजकीय शोक की घोषणा नहीं की थी।

बसपा प्रमुख ने कहा कि दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले कई संगठन और राजनीतिक दल अक्सर बड़े दलों के हाथों की कठपुतली बनकर बसपा को कमजोर करने की कोशिश करते हैं और राजनीतिक लाभ के लिए कांशीराम के नाम का इस्तेमाल करते हैं।

उन्होंने कहा, “अब ये सभी दल कांशीराम द्वारा बनाई गई पार्टी बसपा को अलग-अलग हथकंडों से कमजोर करने में लगे हैं। इसलिए उनके अनुयायियों और समर्थकों को खासकर कांग्रेस के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए, जिसकी दलित विरोधी विचारधारा और मानसिकता ने बसपा के गठन को आवश्यक बना दिया था।”

बाद में जारी एक बयान में मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए याद करना विरोधी दलों, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का नया अवसरवादी फैशन बन गया है।

उन्होंने कहा कि अगर संविधान के समतामूलक और कल्याणकारी उद्देश्यों को सही नीयत से जमीन पर उतारा गया होता तो कांशीराम को बसपा की स्थापना करने की जरूरत ही नहीं पड़ती और बहुजन समाज को गरीबी, बेरोजगारी और पिछड़ेपन जैसी समस्याओं का बोझ आज तक नहीं उठाना पड़ता।

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