लखनऊ, 13 फरवरी 2026। आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए कथित ट्रेड समझौते के विरोध में 14 फरवरी को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी समझौते की प्रतियां जलाकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेगी।
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संजय सिंह के आह्वान पर आयोजित इस प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा, “यह ट्रेड डील नहीं, थ्रेट डील है।” उनका आरोप है कि यह समझौता देश की संप्रभुता, किसानों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों पर सीधा हमला है।
“किसानों के डेथ वारंट पर साइन”
संजय सिंह ने कहा कि सरकार ने भारतीय कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलकर किसानों के “डेथ वारंट” पर हस्ताक्षर किए हैं। उनका दावा है कि नए समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिका 18 प्रतिशत टैक्स लगाएगा, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में टैक्स-फ्री एंट्री दी जा रही है, जिससे करोड़ों किसानों के साथ अन्याय होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निजी हितों और बड़े उद्योगपतियों को बचाने के लिए देश के किसानों और स्वाभिमान को दांव पर लगा रही है। “देश के अन्नदाता के हितों का सौदा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,” उन्होंने कहा।
तेल खरीद को लेकर भी सवाल
आप सांसद ने कहा कि सरकार ने रूस से सस्ता तेल खरीदने के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से महंगा तेल खरीदने का निर्णय लिया है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका दावा है कि रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका द्वारा 25 प्रतिशत टैक्स लगाने की बात कही गई है, जो भारत की संप्रभुता पर प्रश्नचिह्न है।
संजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने ऑयल रिफाइनरियों को रूस के बजाय अमेरिका से तेल खरीदने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत अपने व्यापारिक निर्णय स्वतंत्र रूप से नहीं ले सकता?
“देश का स्वाभिमान गिरवी रखा जा रहा है?”
संजय सिंह ने कहा कि भारत के कपड़ा उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैक्स और बांग्लादेश के उत्पादों पर शून्य टैक्स जैसी शर्तें असमान व्यापार को दर्शाती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समझौते की “अज्ञात शर्तों” को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है और सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
पार्टी ने कहा कि यदि समझौता देशहित में है तो सरकार को उसकी सभी शर्तें सार्वजनिक करनी चाहिए। आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से इस कथित ट्रेड डील को तत्काल रद्द करने और संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की है।
