‘नागरिक प्रथम’ मंत्र को अपनाने की आवश्यकता: प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसेवकों से कहा

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (UNS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के लिए तेजी से बदलते समय के साथ शासन व्यवस्था को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज देश के प्रशासन का मूल मंत्र ‘नागरिक देवो भव:’ है और सार्वजनिक सेवा को नागरिकों की जरूरतों के प्रति अधिक सक्षम और संवेदनशील बनाने के लिए पुनर्गठित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने साधना सप्ताह कार्यक्रम की शुरुआत पर एक वीडियो संदेश में कहा, “शासन को अब सही मायने में नागरिक-केंद्रित बनाकर एक नयी पहचान दी जा रही है।”

शासन व्यवस्था का मानदंड बने नागरिकों का जीवन स्तर

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नागरिकों के जीवन की सुगमता और गुणवत्ता में सुधार ही शासन व्यवस्था का वास्तविक मानदंड होना चाहिए। उन्होंने लोकसेवकों से प्रतिदिन कुछ नया सीखने और अपनी कार्यशैली को समय के अनुरूप ढालने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “हमारी शासन व्यवस्था यह सुनिश्चित करे कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में दिन-प्रतिदिन सुधार हो, यही हमारा सच्चा मानदंड है।”

प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव पर जोर

प्रधानमंत्री ने प्रशासनिक संस्कृति में बुनियादी बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पहले व्यवस्था में ‘अधिकारी’ होने पर अधिक जोर दिया जाता था, जबकि अब ध्यान पूरी तरह कर्तव्य भावना पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि यदि हर निर्णय से पहले लोकसेवक यह सोचें कि उनका कर्तव्य क्या मांगता है, तो निर्णयों का प्रभाव कई गुना बढ़ जाएगा।

राज्यों के बीच समन्वय और तकनीक की भूमिका अहम

प्रधानमंत्री ने भारत की संघीय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सफलता सभी राज्यों की सामूहिक सफलता पर निर्भर करती है। उन्होंने ‘अग्रणी राज्य’, ‘पिछड़े राज्य’ और ‘बीमारू राज्य’ जैसी पुरानी श्रेणियों को समाप्त करने और समन्वित प्रयासों के माध्यम से राज्यों के बीच की खाई को पाटने की आवश्यकता बताई।

प्रौद्योगिकी के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सरकार के कामकाज में तकनीक का व्यापक समावेश हुआ है, जिससे शासन, सेवा वितरण और अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के आगमन के साथ ये परिवर्तन और तेज होंगे, और बेहतर प्रशासक वही होगा जिसे तकनीक और डेटा की गहरी समझ हो।

क्षमता विकास आयोग की भूमिका

यह कार्यक्रम क्षमता विकास आयोग द्वारा 2 से 8 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है, जो सिविल सेवा तंत्र में क्षमता निर्माण के बड़े प्रयासों में से एक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस आयोग की स्थापना का उद्देश्य प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को सशक्त बनाना और शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा नागरिक-केंद्रित बनाना है।

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