नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि SIR की प्रक्रिया का इस्तेमाल सिर्फ नाम काटने के लिए किया जा रहा है और चुनाव आयोग ‘व्हाट्सएप आयोग’ की तरह अनौपचारिक आदेशों के जरिए काम कर रहा है। ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव की पूर्व संध्या पर केवल बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ (न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली) ने मामले की सुनवाई की। मुख्यमंत्री स्वयं अदालत में मौजूद रहीं। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि SIR को पूरा करने के लिए महज चार दिन शेष हैं, जबकि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम ‘तार्किक विसंगति सूची’ में डाले गए हैं और 63 लाख मामलों की सुनवाई लंबित है।
दस्तावेज़ों की अस्वीकृति, लंबी कतारें
राज्य सरकार ने कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र जैसे स्वीकृत दस्तावेज़ों को भी कई जगहों पर खारिज किया जा रहा है, जिससे लोगों को 4–5 घंटे तक कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। दीवान ने यह भी बताया कि 8,300 ‘सूक्ष्म पर्यवेक्षक’ नियुक्त किए गए हैं, जो संविधान में परिकल्पित श्रेणी नहीं है।
नामों में विसंगति पर बहस
सुनवाई के दौरान नामों के उच्चारण और स्थानीय बोलियों से उपजी विसंगतियों पर भी चर्चा हुई। न्यायमूर्ति बागची ने बंगाली उच्चारण का संदर्भ दिया, जबकि मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी समस्याएं देशभर में होती हैं और इन्हें व्यावहारिक ढंग से सुलझाना होगा।
महिलाओं और गरीबों पर असर का आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अदालत में कहा कि शादी के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं, फ्लैट खरीदने या निवास स्थान बदलने वाले गरीबों के नाम एकतरफा तरीके से हटाए जा रहे हैं। कई मामलों में जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 भरने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे 58 लाख नाम कट गए और अपील का प्रभावी विकल्प नहीं मिला।
‘भाजपा शासित राज्यों से पर्यवेक्षक’
ममता ने दावा किया कि भाजपा शासित राज्यों से आए सूक्ष्म पर्यवेक्षक बिना उचित सत्यापन के कार्यालयों में बैठकर नाम हटा रहे हैं, जिससे ईआरओ के अधिकार छीन लिए गए हैं। उन्होंने इसे महिला-विरोधी और लोकतंत्र के खिलाफ बताया।
अदालत की टिप्पणियां और निर्देश
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक व्यावहारिक समाधान निकाला जा सकता है और निर्देश दिया कि राज्य ग्रुप-बी अधिकारियों की वह सूची सोमवार तक दे, जिन्हें उपलब्ध कराया जा सकता है। अदालत ने दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी किया और 9 फरवरी को सभी संबंधित मुद्दों पर सुनवाई तय की। पीठ ने ECI से यह भी कहा कि अधिकारी संवेदनशील रहें और अनावश्यक नोटिस जारी न करें।
आदेश रद्द करने की मांग
अपनी याचिका में ममता बनर्जी ने ECI के 24 जून 2025 और 27 अक्टूबर 2025 के SIR संबंधी आदेशों को रद्द करने और आगामी विधानसभा चुनाव अपरिवर्तित 2025 मतदाता सूची के आधार पर कराने की मांग की है। उनका तर्क है कि 2002 की आधारभूत सूची पर निर्भरता और कठोर सत्यापन प्रक्रिया वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार के लिए खतरा है।
सुनवाई के अंत में मुख्यमंत्री ने पीठ का आभार जताते हुए कहा कि वह किसी दल के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ रही हैं।
