कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर कड़ा विरोध जताते हुए एक बार फिर अदालत जाने का ऐलान किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा।
ममता बनर्जी की यह प्रतिक्रिया राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आंकड़ों के सामने आने के बाद आई है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाकर उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को हराया नहीं जा सकता और इस मुद्दे को लेकर वे दोबारा अदालत का रुख करेंगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है और संविधान के तहत हर नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने कहा, “अगर लोग वोट ही नहीं डाल सकते, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का क्या मतलब रह जाता है? हम इस पूरी प्रक्रिया को अदालत में चुनौती देंगे।”
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में राज्य में कुल 7.66 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से 90.83 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जो करीब 11.85 प्रतिशत है। इस पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाया जाना गंभीर चिंता का विषय है।
हुगली जिले के आरामबाग और बालागढ़ में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर मतदाता सूची में हेरफेर और मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि निर्वाचन आयोग लोगों को फोन कर दबाव बना रहा है, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा को वोट देने के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी पड़ सकते हैं।
ममता बनर्जी का यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर रहा है और आने वाले चुनावों से पहले इस मुद्दे के और गरमाने के संकेत दे रहा है।
