नयी दिल्ली, 7 मार्च : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उछाल के बीच शनिवार को घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमत में 60 रुपये और व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की वृद्धि की गई। हालांकि सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में अब 14.2 किलोग्राम के गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है। यह एक साल से भी कम समय में दूसरी बड़ी वृद्धि है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 10 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को भी यही बढ़ोतरी झेलनी होगी। हालांकि उन्हें 300 रुपये की सब्सिडी के बाद प्रति सिलेंडर 613 रुपये चुकाने होंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल के कारण यह बढ़ोतरी जरूरी हो गई थी। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद वर्तमान दर लागत के बराबर होने के लिए आवश्यक लगभग 1,050 रुपये प्रति सिलेंडर से अभी भी काफी कम है।
सूत्रों ने कहा कि एक परिवार की औसत सालाना खपत 4 से 5 सिलेंडर होती है, ऐसे में यह वृद्धि एक परिवार के लिए करीब 80 पैसे प्रतिदिन या प्रति व्यक्ति लगभग 20 पैसे प्रतिदिन के बराबर बैठती है। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद भारत में एलपीजी काठमांडू, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में अभी भी सस्ती है।
अधिकारियों ने बताया कि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर बनी हुई हैं और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां फिलहाल इस अंतरराष्ट्रीय दबाव को सहन करने की स्थिति में हैं।
बताया गया कि यह वृद्धि हाल ही में ईरान पर हुए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य संघर्ष का परिणाम है। इस तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है।
28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत लगभग 35.63 प्रतिशत बढ़कर 90.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो 1983 के बाद से इसका सबसे बड़ा साप्ताहिक उछाल माना जा रहा है। वहीं एशियाई एलएनजी की कीमतें भी बढ़कर 25.40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।
भारत अपनी एलपीजी खपत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब जैसे देशों से आता है, जो पारगमन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं। घरेलू आपूर्ति को मजबूत करने के लिए सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।
