चंडीगढ़, 9 मार्च । पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2002 में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अगुवाई वाली खंडपीठ ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। सोमवार को जारी 113 पन्नों के विस्तृत फैसले में अदालत ने कहा कि इस मामले में मुख्य गवाह की गवाही भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि उसने कई बार अपने बयान बदले।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ अपना मामला साबित नहीं कर पाया, जबकि अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं। इसलिए अदालत ने तीन अन्य दोषियों की सजा बरकरार रखी।
पीठ ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि यदि किसी मामले में आरोपी के दोषी होने और निर्दोष होने की दो संभावनाएं हों, तो आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।
अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह खट्टा सिंह की गवाही भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती, क्योंकि उन्होंने कई वर्षों तक चुप्पी साधे रखी और बाद में बार-बार अपने बयान बदले।
अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जांच एजेंसी ने जांच को जल्द समाप्त करने के दबाव में गवाह पर बयान देने के लिए दबाव डाला।
गौरतलब है कि जनवरी 2019 में पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में गुरमीत राम रहीम सिंह और तीन अन्य को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को राम रहीम ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
इससे पहले मई 2024 में भी पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने संप्रदाय के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में गुरमीत राम रहीम और चार अन्य आरोपियों को अपर्याप्त और अस्पष्ट जांच का हवाला देते हुए बरी कर दिया था।
फिलहाल गुरमीत राम रहीम सिंह हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद हैं, जहां वह अपनी दो शिष्याओं से दुष्कर्म के मामले में 2017 से 20 वर्ष की सजा काट रहे हैं।
