दुबई, 6 अप्रैल। नए युद्धविराम प्रस्ताव के बीच इज़राइल ने ईरान के विशाल साउथ पार्स प्राकृतिक गैस क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण पेट्रो-रसायन संयंत्र पर बड़ा हमला किया, जिसमें ईरान की अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक शीर्ष कमांडर की मौत हो गई। इस हमले ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने हमले की पुष्टि करते हुए इसे ईरान के सबसे बड़े पेट्रो-रसायन प्रतिष्ठान पर किया गया भीषण हमला बताया। बताया जाता है कि इस संयंत्र से ईरान के कुल पेट्रो-रसायन उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा निकलता है, जिससे इस हमले को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
इज़राइली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नादाव शोशानी ने कहा कि बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद ईरान को किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि इज़राइल अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
इस बीच, तेहरान में कई स्थानों पर जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं और राजधानी के ऊपर घंटों तक लड़ाकू विमानों की आवाज गूंजती रही। एक हवाई हमले में शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर को भी निशाना बनाया गया, जिसके बाद शहर के आज़ादी चौक क्षेत्र के पास घना धुआं उठता दिखाई दिया।
रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष कमांडर की मौत, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव; तेल कीमतों में तेज उछाल
ईरानी सरकारी मीडिया और इज़राइल के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, तेहरान पर हुए हमलों में मारे गए लोगों में रिवोल्यूशनरी गार्ड के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल माजिद खादेमी भी शामिल हैं। वहीं इज़राइली सेना ने दावा किया है कि उसने रिवोल्यूशनरी गार्ड की खुफिया इकाई कुद्स फोर्स के प्रमुख असगर बाकेरी को भी मार गिराया है।
उधर, जवाबी कार्रवाई में ईरान ने उत्तरी इज़राइल के शहर हाइफ़ा पर मिसाइलें दागीं, जहां एक रिहायशी इमारत के मलबे से चार लोगों के शव बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, तेहरान के दक्षिण-पश्चिम में इस्लामशहर के पास हुए हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हुई, जबकि कोम और अन्य शहरों में हुए हमलों में कई अन्य लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी है, ताकि मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोका जा सके। ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के कारण वैश्विक तेल बाजार में भी भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत सोमवार सुबह शुरुआती कारोबार में बढ़कर 109 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है।
इसी बीच, युद्ध को रोकने के प्रयास तेज हो गए हैं। मध्यस्थ देशों मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये ने ईरान और अमेरिका को 45 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव भेजा है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और शांति वार्ता के लिए समय देने की बात कही गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर जलडमरूमध्य नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। उन्होंने कहा कि स्थिति गंभीर है और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
