सिडनी, 9 मार्च । रमजान के पवित्र महीने के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत देश के इस्लामी गणराज्य के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ों में से एक मानी जा रही है। उनके उत्तराधिकारी के रूप में उनके पुत्र मुजतबा खामेनेई का नाम सामने आया है, जो 1979 की ईरानी क्रांति के बाद स्थापित राजनीतिक व्यवस्था में निरंतरता और विरोधाभास दोनों का प्रतीक माने जा रहे हैं।
यह सवाल केवल नेतृत्व परिवर्तन का नहीं है, बल्कि इस बात का भी है कि लगभग आधी सदी पहले वंशवादी शासन को समाप्त करने का वादा करने वाला इस्लामी गणराज्य अब किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
कौन हैं मुजतबा खामेनेई
मुजतबा खामेनेई एक धर्मगुरु हैं, जिन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन का अधिकांश समय औपचारिक राजनीतिक पदों से दूर रहते हुए लेकिन सत्ता के केंद्र के बेहद करीब बिताया है। वे लंबे समय तक सर्वोच्च नेता के कार्यालय से जुड़े रहे और अक्सर उन्हें सत्ता के गलियारों में एक प्रभावशाली मध्यस्थ या ‘द्वारपाल’ के रूप में देखा गया।
महज 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने ईरान–इराक युद्ध के दौरान संक्षिप्त रूप से सेवा दी थी। 1990 के दशक के अंत में वे पहली बार सार्वजनिक रूप से चर्चा में आए, जब उनके पिता की सत्ता सर्वोच्च नेता के रूप में मजबूत हो चुकी थी।
समय के साथ उनकी पहचान दो प्रमुख विशेषताओं से जुड़ी रही। पहली, ईरान के सुरक्षा तंत्र विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और उससे जुड़े कट्टरपंथी नेटवर्क के साथ उनके करीबी संबंध। दूसरी, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी हस्तक्षेप के प्रति उनका कठोर विरोध।
आलोचक उन्हें 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनावों के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दमन से भी जोड़ते हैं। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि उनका देश के सरकारी प्रसारण तंत्र पर प्रभाव रहा है, जिससे उन्हें सूचना और जनमत के एक हिस्से पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण मिला।
वर्ष 2019 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मुजतबा पर प्रतिबंध लगा दिया था। आरोप था कि वे बिना किसी औपचारिक सरकारी पद के भी सर्वोच्च नेता की ओर से प्रभावी भूमिका निभा रहे थे।
सर्वोच्च नेता बनने की वैधता
ईरान के संविधान के अनुसार, सर्वोच्च नेता का चयन विशेषज्ञों की सभा करती है, जो 88 धर्मगुरुओं का एक निकाय है। यह संस्था संभावित उम्मीदवारों की धार्मिक, राजनीतिक और नेतृत्व संबंधी योग्यताओं का मूल्यांकन करती है।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और कई संस्थान अंततः सर्वोच्च नेता के प्रभाव में काम करते हैं।
मुजतबा खामेनेई को लेकर यह भी सवाल उठता रहा है कि क्या उनके पास पारंपरिक रूप से वरिष्ठ धर्मगुरु की वह प्रतिष्ठा है जो इस पद के लिए अपेक्षित मानी जाती है। लेकिन 2022 में उन्हें अयातुल्ला की उपाधि दी गई, जो सर्वोच्च नेता बनने के लिए आवश्यक मानी जाती है। इसे कई विश्लेषक इस संकेत के रूप में देखते हैं कि उन्हें अपने पिता के बाद नेतृत्व संभालने के लिए तैयार किया जा रहा था।
वंशवाद का सवाल
1979 की ईरानी क्रांति का एक मूल सिद्धांत वंशवादी शासन का विरोध था। शाह के शासन को समाप्त करने के बाद क्रांतिकारी नेतृत्व ने पारिवारिक सत्ता हस्तांतरण को अस्वीकार कर दिया था।
ऐसे में कई ईरानियों के लिए पिता के बाद पुत्र का सर्वोच्च नेता बनना वैचारिक गिरावट जैसा प्रतीत हो सकता है। इससे शासन व्यवस्था एक तरह के धर्मतांत्रिक राजतंत्र जैसी दिखने लगती है।
हालांकि तकनीकी रूप से मुजतबा केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर सत्ता नहीं संभाल सकते। उन्हें विशेषज्ञों की सभा द्वारा औपचारिक रूप से चुना जाना जरूरी है। इसके बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि राजनीति में अनौपचारिक शक्ति नेटवर्क—जैसे पारिवारिक संबंध, सुरक्षा प्रतिष्ठान का समर्थन और मीडिया प्रभाव—किसी उम्मीदवार को स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित कर सकते हैं।
धार्मिक और प्रतीकात्मक महत्व
अली खामेनेई की मौत रमजान के दौरान हुई, जिसका शिया परंपरा में गहरा धार्मिक महत्व है। शिया इतिहास में पहले इमाम अली इब्न अबी तालिब की हत्या भी रमजान के दौरान हुई थी, जिसे आज भी शिया समुदाय विशेष रूप से याद करता है।
इसके अलावा पैगंबर मुहम्मद के नवासे हुसैन इब्न अली की कर्बला में शहादत शिया परंपरा में न्याय और उत्पीड़न के संघर्ष का प्रतीक है। यदि ईरानी शासन खामेनेई की मौत को शहादत की कहानी के रूप में प्रस्तुत करता है, तो इससे उनके बेटे मुजतबा को धार्मिक वैधता का एक मजबूत प्रतीकात्मक आधार मिल सकता है।
क्या मुजतबा अपने पिता से अलग होंगे?
विश्लेषकों के अनुसार यह सबसे अहम प्रश्न है, लेकिन इसका उत्तर शायद उतना नाटकीय नहीं होगा जितनी उम्मीद की जा रही है।
अली खामेनेई क्रांतिकारी पीढ़ी के प्रमुख नेता थे, जिनकी शक्ति वैचारिक वैधता, लंबे राजनीतिक अनुभव और विभिन्न गुटों के बीच संतुलन बनाए रखने की क्षमता पर आधारित थी।
इसके विपरीत, मुजतबा को अक्सर एक सार्वजनिक धार्मिक नेता से अधिक सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े व्यक्ति के रूप में देखा जाता है। वे भाषणों या धार्मिक अधिकार की तुलना में पर्दे के पीछे काम करने वाले प्रभावशाली नेटवर्क के लिए जाने जाते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि उनके नेतृत्व में ईरान की राजनीति अधिक सुरक्षा-केंद्रित हो सकती है। इसके तीन संभावित परिणाम सामने आ सकते हैं। पहला, देश के भीतर विरोध प्रदर्शनों और अशांति के प्रति अधिक कठोर दमन की नीति अपनाई जा सकती है। दूसरा, आईआरजीसी का क्षेत्रीय राजनीति में प्रभाव और बढ़ सकता है। तीसरा, पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में बड़े बदलाव की बजाय रणनीतिक और सावधानीपूर्ण कूटनीति अपनाई जा सकती है।
संक्षेप में, मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति बयानबाजी के स्तर पर टकरावपूर्ण रह सकती है, लेकिन यदि शासन की स्थिरता पर खतरा उत्पन्न होता है तो व्यावहारिक दृष्टिकोण भी अपनाया जा सकता है।
