ईरान-इजराइल संघर्ष तेज, खाड़ी में तेल-गैस ठिकानों पर हमले बढ़े; वैश्विक बाजार में उथल-पुथल

दुबई, 19 मार्च। ईरान ने अपने प्रमुख गैस क्षेत्र पर इजराइल के हमले के जवाब में खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर हमले तेज कर दिए हैं। इससे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ने लगा है।

हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत युद्ध शुरू होने के बाद से 60 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा लगातार अवरोध पैदा किए जाने से पहले से दबाव में चल रही वैश्विक आपूर्ति और प्रभावित हुई है। खाड़ी क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक जहाज में आग लगा दी गई, जबकि कतर के निकट एक अन्य पोत क्षतिग्रस्त हुआ।

इसके अलावा, एक ईरानी ड्रोन ने सऊदी अरब के लाल सागर तट पर स्थित यानबू शहर की रिफाइनरी को निशाना बनाया। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

यह घटनाक्रम साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर इजराइली हमले के बाद सामने आया है, जिसे ईरान ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा हमला बताया है।

वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कतर के तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ठिकानों पर फिर हमला हुआ, तो अमेरिका कड़ी जवाबी कार्रवाई करेगा।

अरब लीग के महासचिव अहमद अबूल घीत ने इन हमलों को “खतरनाक उकसावे” वाला कदम बताया है। खाड़ी के देशों—कतर, सऊदी अरब और यूएई—ने भी ईरान की कार्रवाई की निंदा की है।

उधर, पेंटागन ने इस युद्ध से निपटने के लिए 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग की है।

इस बीच, ईरानी हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। कई गैस संयंत्रों और रिफाइनरियों में संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

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