पश्चिम एशिया युद्ध के असर से निवेशकों को 51 लाख करोड़ रुपये का नुकसान, सेंसेक्स 11 प्रतिशत टूटा

नयी दिल्ली, 31 मार्च (UNS)। पश्चिम एशिया में फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। इस दौरान प्रमुख शेयर सूचकांक BSE Sensex 11 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों पर युद्ध के व्यापक प्रभाव के कारण निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं, जबकि विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है।

28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से सेंसेक्स 9,339.64 अंक यानी 11.48 प्रतिशत गिर चुका है। इस भारी गिरावट के चलते बॉम्बे शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 51,09,498.82 करोड़ रुपये घटकर 4,12,41,172.45 करोड़ रुपये (लगभग 4,360 अरब डॉलर) रह गया है।

वित्तीय सेवा कंपनी Enrich Money के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर ने कहा कि मौजूदा नरमी का मुख्य कारण दुनिया में बढ़ी अनिश्चितता है, न कि अर्थव्यवस्था की बुनियादी कमजोरी। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार में जोखिम से बचने का माहौल बना दिया है।

सेंसेक्स अब तक के अपने उच्चतम स्तर 86,159.02 अंक से 14,211.47 अंक यानी 16.49 प्रतिशत नीचे आ चुका है। इसी दौरान वैश्विक तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल 4.15 प्रतिशत बढ़कर 117.46 डॉलर प्रति बैरल हो गया है, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है।

शेयर बाजार के जानकारों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और रुपये की कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों ने मार्च 2026 में भारतीय शेयर बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकाल ली है, जो किसी एक महीने में अब तक की सबसे बड़ी निकासी मानी जा रही है।

ब्रोकिंग कंपनी Bajaj Broking के सहायक उपाध्यक्ष (तकनीकी अनुसंधान) पी मुखर्जी ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद के चार सप्ताह में जोखिम से बचने की तेज प्रवृत्ति देखने को मिली है। यह स्थिति वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान वैश्विक बाजार में आई उथल-पुथल के बाद सबसे तेज मानी जा रही है।

उन्होंने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण बनी है, जिससे शेयर बाजार पर लगातार दबाव बना हुआ है। सोमवार को वित्त वर्ष 2025-26 के अंतिम कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए।

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