भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया गया : राहुल गांधी

नयी दिल्ली, 12 मार्च (RNN)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रसोई गैस (एलपीजी) की संभावित किल्लत को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के साथ समझौता किया है।

संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि देश में जल्द ही ईंधन की समस्या बढ़ सकती है और सरकार को समय रहते इसके लिए जरूरी प्रबंध करने चाहिए। उन्होंने कहा, “मुख्य बात यह है कि रसोई गैस की समस्या होने वाली है, पेट्रोल की समस्या होने वाली है। सभी ईंधनों को लेकर समस्या खड़ी होने जा रही है, क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया गया है।”

उन्होंने कहा कि अभी भी तैयारी करने का समय है और सरकार को तुरंत इस दिशा में कदम उठाने चाहिए। राहुल गांधी के अनुसार यदि समय रहते तैयारी नहीं की गई तो इसका खामियाजा करोड़ों लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि यह केवल घरेलू समस्या नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यह भी बड़ा सवाल है कि ईरान भारत को ईंधन उपलब्ध कराएगा या नहीं, क्योंकि दुनिया एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सरकार को अपनी रणनीति और सोच में बदलाव करना चाहिए और संभावित परिस्थितियों के लिए गंभीरता से तैयारी करनी चाहिए ताकि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। राहुल गांधी ने कहा कि वह इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बना रहे हैं, बल्कि उन्हें भविष्य में बड़ी समस्या दिखाई दे रही है।

बाद में उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इस मुद्दे को उठाते हुए लिखा कि यदि सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो एलपीजी, पेट्रोल और डीजल करोड़ों भारतीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर और दिशाहीन विदेश नीति ने देश को इस स्थिति में ला खड़ा किया है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को संसद के भीतर ईंधन संकट पर ‘मन की बात’ करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कई हिस्सों में एलपीजी की कमी के कारण लोग कतारों में खड़े हैं और कई छोटे-बड़े उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं।

खरगे ने कहा कि कूटनीति की विफलता और ऊर्जा प्रबंधन की नाकामी का खामियाजा देश की 140 करोड़ जनता को भुगतना पड़ रहा है, जबकि सरकार केवल दावे कर रही है।

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