भारतीय समाज अपनी परंपरा और संस्कृति का सम्मान करना जानता है: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, पांच अप्रैल (UNS)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि भारतीय समाज अपनी परंपरा, संस्कृति और विरासत को सम्मान देना भली-भांति जानता है। उन्होंने कहा कि रंगमंच समाज को दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम है और यह जनचेतना को जागृत करने में अहम भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने यह बात यहां भारतेंदु नाट्य अकादमी (बीएनए) की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य ‘स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह’ के उद्घाटन अवसर पर कही। यह समारोह 12 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा।

रंगमंच समाज का दर्पण: योगी

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा,
“आज रंगमंच अच्छा प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है तो समाज भी उस अच्छाई को उसी रूप में स्वीकार कर रहा है। हम बचपन से सुनते आए हैं कि रंगमंच समाज का दर्पण होता है और वही समाज की दिशा तय करता है।”

उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे लोकप्रिय धारावाहिक ‘रामायण’ रहा है, जो यह दर्शाता है कि भारतीय समाज अपनी परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को कितनी गंभीरता से अपनाता है।

‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति हर जिले में हो

मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के अकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय कृत उपन्यास ‘आनंद मठ’ से प्रेरित नाट्य प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने सुझाव दिया कि ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति प्रत्येक जिले में आयोजित की जानी चाहिए और इसे विस्तृत रूप में मंचित किया जाना चाहिए, ताकि लोग उस ऐतिहासिक त्रासदी को गहराई से समझ सकें।

उन्होंने कहा कि मंचन के माध्यम से लोगों को उस दौर की कठिनाइयों और संघर्षों का एहसास कराना आवश्यक है, जिससे राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना को बल मिलता है।

इतिहास से सीख लेने की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी शासन के दौरान बंगाल में आए अकाल की त्रासदी को गंभीरता से नहीं लिया गया था, जिसके कारण लाखों लोग भूख से मर गए। उन्होंने बताया कि उस समय देश की आबादी 30 करोड़ से कम थी और लगभग तीन करोड़ लोग अकाल की चपेट में आ गए थे।

उन्होंने कहा,
“जब सरकार संवेदनशील होती है, तो वह सीधे सामने आकर समस्या से लड़ती है और उसे परास्त भी करती है।”

कोरोना काल में सरकार की भूमिका का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में श्रमिकों के लिए परिवहन, पृथकवास केंद्र और राशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित स्वदेशी टीके पूरी दुनिया के लिए उदाहरण बने हैं।

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