पश्चिम एशिया संकट पर भारत सक्रिय: मोदी ने विश्व नेताओं से की बातचीत

प्रधानमंत्री मोदी ने इमैनुएल मैक्रों (फ्रांस), शाह अब्दुल्ला द्वितीय (जॉर्डन), हैथम बिन तारिक (ओमान) और अनवर इब्राहिम (मलेशिया) से अलग-अलग टेलीफोन वार्ता की

नई दिल्ली, 19 मार्च 2026। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हो रहे हमलों के बीच नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कई प्रमुख देशों के नेताओं से बातचीत कर हालात पर चिंता जताई और शांति बहाली के लिए कूटनीति पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इमैनुएल मैक्रों (फ्रांस), शाह अब्दुल्ला द्वितीय (जॉर्डन), हैथम बिन तारिक (ओमान) और अनवर इब्राहिम (मलेशिया) से अलग-अलग टेलीफोन वार्ता की। इन वार्ताओं में उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष, ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों और वैश्विक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा ठिकानों पर हमले “निंदनीय और अस्वीकार्य” हैं, क्योंकि इससे न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ती है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद व कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने की अपील की।

इस बीच भारत सरकार ने भी आधिकारिक रूप से इन हमलों की निंदा की। रणधीर जायसवाल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ऊर्जा और नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है और इससे वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र और अधिक अस्थिर हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “ऐसे हमले तुरंत रोके जाने चाहिए।”

प्रधानमंत्री मोदी ने जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से बातचीत में क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में उनके सहयोग की सराहना की। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ बातचीत में दोनों नेताओं ने तनाव कम करने और शांति बहाली के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई। वहीं मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ चर्चा में भी कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया गया।

गौरतलब है कि ईरान-इजराइल संघर्ष के बाद खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले तेज हुए हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। कतर जैसे देशों से भारत की ऊर्जा निर्भरता को देखते हुए यह स्थिति भारत के लिए भी अहम बनी हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी पहले ही सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल और ईरान सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत कर चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि भारत इस संकट पर कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

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