सर्वधर्म सम्मेलन में पार्क के लिए ₹2 लाख व डिजिटल लैब हेतु 5 कंप्यूटर की घोषणा, गुरुकुल में शिव व आदिगुरु शंकराचार्य प्रतिमाओं का अनावरण
लखनऊ, 8 फरवरी 2026। सामाजिक समरसता, सर्वधर्म सौहार्द और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम रविवार को सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला, जब विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने एक ओर 26वें सर्वधर्म सम्मेलन में सहभागिता कर एकता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर हनुमंत आश्रय आश्रम स्थित कपीश्वर वैदिक गुरुकुल में भगवान शिव एवं आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमाओं का विधिवत अनावरण कर सनातन संस्कारों के संरक्षण का संकल्प दोहराया।
आशियाना सेक्टर–K स्थित द्विवेदी पार्क में ‘आशियाना परिवार’ संस्था द्वारा आयोजित 26वें सर्वधर्म सम्मेलन, वार्षिक बैठक एवं खिचड़ी भोज कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सामाजिक समरसता है। आज़ादी से लेकर विश्व मंच पर सशक्त राष्ट्र बनने तक हर धर्म, हर वर्ग और हर समुदाय का समान योगदान रहा है।

डॉ. सिंह ने शिक्षा को भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए डिजिटल साक्षरता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने महाकालेश्वर तपोभूमि वैदिक संस्कृत महाविद्यालय एवं गौशाला के विद्यार्थियों के लिए डिजिटल लैब स्थापना हेतु 5 कंप्यूटर उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को सभी धर्मों का साझा दायित्व बताते हुए आशियाना द्विवेदी पार्क के सौंदर्यीकरण के लिए विधायक निधि से ₹2 लाख अतिरिक्त सहयोग देने की घोषणा भी की।
अपने संबोधन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजनीनगर आज सामाजिक सौहार्द और साझा विरासत का जीवंत मॉडल बन चुका है। क्षेत्र में भगवान परशुराम, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी, कल्याण सिंह और गुरु नानक देव जी के सम्मान में स्थापित प्रतिमाएं तथा गुरु नानक द्वार सभी आस्थाओं के प्रति समान सम्मान का प्रतीक हैं। गुरुद्वारे के समक्ष स्थापित स्वर्गीय हेमू कलानी जी की प्रतिमा सिंधी समाज के राष्ट्रप्रेम और बलिदान को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत की लड़ाई कभी धर्म की नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध रही है, जिसे अशफाक उल्ला खान, रामप्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह और बेगम हज़रत महल जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने सिद्ध किया।

डॉ. सिंह ने कहा, “सरोजनीनगर केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि मेरा परिवार है,” और बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग के उत्थान के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न धर्माचार्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और श्रमजीवियों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक, एनसीसी के छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
इसके पश्चात पंचवटी घाट, पक्का पुल चौक स्थित हनुमंत आश्रय आश्रम के कपीश्वर वैदिक गुरुकुल में आयोजित भगवान शिव एवं आदि गुरु शंकराचार्य जी की प्रतिमाओं के अनावरण एवं पूजन कार्यक्रम में डॉ. राजेश्वर सिंह ने सहभागिता की। इस अवसर पर ‘दिव्य दृष्टि’ (वर्चुअल रियलिटी) प्रणाली का शुभारंभ किया गया, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं को देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के दिव्य दर्शन कराए जाएंगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि बजरंगबली की सेवा ही जीवन की सर्वोच्च साधना है। प्रभु श्रीराम और हनुमान जी का भाव— “देह से दास, मन से अंश और आत्मा से अभिन्न”— समाज और राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक दर्शन है। उन्होंने बताया कि गुरुकुल में पूर्व में डिजिटल लैब की स्थापना की जा चुकी है और इसे स्मार्ट क्लास से सुसज्जित करने का भी संकल्प लिया गया है।
डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि सरोजनीनगर क्षेत्र में सनातन मूल्यों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अब तक 5,000 से अधिक श्रद्धालुओं को निःशुल्क अयोध्या दर्शन तथा 190 से अधिक प्राचीन मंदिरों का सौंदर्यीकरण किया जा चुका है। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उन्होंने गुरुकुल प्रमुख डॉ. विवेक तांगड़ी के प्रति आभार व्यक्त किया।
दोनों आयोजनों के माध्यम से डॉ. राजेश्वर सिंह ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सामाजिक समरसता, आधुनिक शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत— तीनों के समन्वय से ही सशक्त भारत और समृद्ध सरोजनीनगर का निर्माण संभव है।
