हेलीकॉप्टर पायलट से व्यापार दूत और फिर विवादों में घिरे एंड्रयू, 66वें जन्मदिन पर गिरफ्तारी

लंदन, 19 फरवरी । ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के प्रिय पुत्र रहे पूर्व राजकुमार प्रिंस एंड्रयू एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में हैं। पुलिस ने महाराजा चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर को सार्वजनिक पद पर रहते हुए कथित कदाचार के संदेह में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उनके 66वें जन्मदिन पर हुई।

एंड्रयू का जन्म 1960 में हुआ था और वह महारानी तथा प्रिंस फिलिप की दूसरी संतान हैं। बड़े भाई चार्ल्स जहां सिंहासन के उत्तराधिकारी थे, वहीं एंड्रयू ने सैन्य सेवा का मार्ग चुना। उन्होंने रॉयल नेवी में 22 वर्ष तक सेवा दी और 1982 के फॉकलैंड युद्ध के दौरान हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में युद्धक अभियानों में भाग लिया।

वर्ष 2001 में उन्हें ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश मामलों का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया गया। वर्तमान पुलिस जांच उसी अवधि से जुड़ी बताई जा रही है। हालांकि उन पर अब तक औपचारिक रूप से कोई अपराध सिद्ध नहीं हुआ है, लेकिन उनका नाम अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन के साथ संबंधों को लेकर लगातार विवादों में रहा है।

एप्स्टीन को 2008 में नाबालिग को वेश्यावृत्ति में धकेलने के मामले में दोषी ठहराया गया था। 2011 में एप्स्टीन से मित्रता पर बढ़ते दबाव के चलते एंड्रयू को अपने व्यापार दूत पद से इस्तीफा देना पड़ा। 2019 में एप्स्टीन की दोबारा गिरफ्तारी के बाद एंड्रयू ने न्यूज़नाइट कार्यक्रम में एक साक्षात्कार दिया, जिसकी व्यापक आलोचना हुई। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक कर्तव्यों से हटने की घोषणा की।

अगस्त 2021 में एप्स्टीन की कथित पीड़िता वर्जीनिया गिउफ्रे ने न्यूयॉर्क की अदालत में एंड्रयू के खिलाफ मुकदमा दायर किया। एंड्रयू ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन बाद में एक अज्ञात राशि देकर समझौता कर लिया। उन्होंने कोई गलती स्वीकार नहीं की, परंतु गिउफ्रे की पीड़ा को स्वीकार किया।

पिछले वर्ष सामने आए ईमेल के बाद राजा चार्ल्स तृतीय ने एंड्रयू से उनकी शाही उपाधियां और विंडसर स्थित रॉयल लॉज का निवास भी वापस ले लिया। ईमेल से संकेत मिला कि एंड्रयू का एप्स्टीन से संपर्क पहले बताए गए समय से अधिक लंबा था।

अब पुलिस हिरासत में लिए गए एंड्रयू ब्रिटिश सिंहासन के उत्तराधिकार क्रम में आठवें स्थान पर हैं। उनका मामला ब्रिटिश राजपरिवार के लिए लंबे समय से एक संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषय बना हुआ है।

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