खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 से निवेश, निर्यात और रोजगार को रफ्तार

लखनऊ, 18 फरवरी 2026 — उत्तर प्रदेश में लागू खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 राज्य को एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मार्गदर्शन में यह नीति निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति की 16वीं बैठक में नीति के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में स्वीकृत परियोजनाओं के अनुमोदन में विलंब के मामलों को प्राथमिकता से निपटाने और संबंधित विभागों व उद्यमियों के साथ नियमित वर्चुअल बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही विभिन्न जनपदों में इकाइयों के संतुलित विस्तार और संभावित औद्योगिक सैचुरेशन का आकलन करने के लिए ग्राउंड सर्वे कराने पर भी बल दिया गया।

नीति के तहत अब तक 593 प्रस्तावों को अप्रेजल समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिनमें से 471 प्रस्ताव राज्य स्तरीय समिति को भेजे गए और 460 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। ताजा बैठक में 22 नई परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने की मंजूरी दी गई, जिन पर लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है और करीब 55 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा।

जनपद स्तर पर परियोजनाओं की प्रगति भी उल्लेखनीय रही है। बरेली 33 स्वीकृत परियोजनाओं के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर है, जबकि कानपुर नगर दूसरे स्थान पर है। आगरा और रामपुर संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर हैं। क्षेत्रीय औद्योगिक विकास के तहत अमेठी और सुल्तानपुर पशु एवं कुक्कुट चारा उत्पादन के हब के रूप में उभर रहे हैं, जबकि सहारनपुर और पीलीभीत जैसे जिलों में फ्रोजन फल-सब्जी और मशरूम उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है।

वित्तीय प्रगति के आंकड़े भी नीति की प्रभावशीलता दर्शाते हैं। पिछले वर्ष की तुलना में अनुदान वितरण और इकाइयों को दी गई सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में बजट व्यय और सब्सिडी वितरण दोनों में तीव्र वृद्धि हुई है, जिससे उद्यमिता को नई गति मिली है।

बैठक में नीति के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए लघु डॉक्यूमेंटरी तैयार करने और लाभान्वित उद्यमियों की सफलता की कहानियां साझा करने का निर्णय लिया गया, ताकि युवाओं और स्टार्ट-अप्स को प्रेरणा मिल सके। साथ ही स्थानीय किसानों की भागीदारी बढ़ाकर कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और उनकी आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को औद्योगिक मूल्य श्रृंखला से जोड़ते हुए ग्रामीण रोजगार और निर्यात क्षमता को नई दिशा दे रही है।

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