नई दिल्ली, 05 अप्रैल (UNS)। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके प्रभाव को लेकर शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से टेलीफोन पर चर्चा की।
विदेश मंत्री ने इसके अलावा शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की बदलती स्थिति पर विचार-विमर्श किया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को नौवहन के लिए फिर से नहीं खोला गया, तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाए जाने की चेतावनी दी गई है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री के साथ जारी संघर्ष को लेकर विस्तार से बातचीत हुई है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री के साथ भी पश्चिम एशिया की स्थिति और संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई।
भारत के लिए पश्चिम एशिया क्षेत्र ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत रहा है। ऐसे में भारत सरकार इस क्षेत्र में शांति बहाली और ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रही है। भारत का मानना है कि यदि इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रहती है, तो भारत समेत कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
