गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, बायोगैस व चारा प्रबंधन को बढ़ावा: धर्मपाल सिंह

लखनऊ, 07 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने राज्य में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए गोबर गैस (बायोगैस) के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गोबर से बनने वाली बायोगैस सस्ती, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा का स्रोत है, जो किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है।

विधान भवन स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान मंत्री ने सभी गौशालाओं में गोबर के समुचित उपयोग पर बल देते हुए गर्मी के मद्देनजर त्रिपाल, हरे चारे, पानी और भूसे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गौशाला में निःशुल्क बोरिंग कराई जाए, ताकि पानी की कमी न हो।

श्री सिंह ने प्रदेश की सभी गौशालाओं में न्यूनतम 10 कुंटल भूसे का आरक्षित भंडार अनिवार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही 15 अप्रैल से विशेष भूसा संग्रह अभियान चलाकर दान एवं क्रय के माध्यम से भंडारण सुनिश्चित करने को कहा। गेहूं की कटाई के समय स्थानीय किसानों से 400 से 650 रुपये प्रति कुंटल की दर से भूसा खरीदने के निर्देश भी दिए गए।

मंत्री ने 15 मई तक गोचर भूमि पर हाईब्रिड नेपियर घास की रोपाई सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि रूटस्लिप फार्मों से चारा उत्पादक किसानों और गोआश्रय स्थलों को इसकी उपलब्धता कराई जाए। उन्होंने वर्षभर हरे चारे की आपूर्ति के लिए किसानों से अनुबंध करने और गौशालाओं के आसपास की गोचर भूमि का विस्तार करने पर भी जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 7416 गोआश्रय स्थलों में लगभग 12.37 लाख गोवंश संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.14 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.84 लाख से अधिक गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। 2500 से अधिक गौशालाओं में बीमार और कमजोर गोवंश के लिए आइसोलेशन कक्ष बनाए गए हैं।

कुछ जनपदों द्वारा समय पर फंड रिक्वेस्ट न भेजने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है, जबकि भूसा आपूर्ति में लापरवाही बरतने वाले आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इटावा के वेदपुरा गोआश्रय स्थल में चारे की कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी गई है।

मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी गौशालाओं में वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जाए तथा गोबर और गोमूत्र से पंचगव्य आधारित उत्पाद—अगरबत्ती, धूपबत्ती, गोकाष्ठ, गोआर्क, दीये और अन्य सामग्री—बनाकर गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए। इस कार्य में महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ने पर भी विशेष बल दिया गया।

बैठक में अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि निरीक्षण में पाई गई कमियों को शीघ्र दूर कर गौशालाओं में चारा, पानी और अन्य आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

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