नयी दिल्ली, 9 मार्च । विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने लोकसभा में कहा कि उस क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
संसद के दोनों सदनों में दिए गए अपने वक्तव्य में जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार पश्चिम एशिया के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हालात चिंताजनक हैं और संघर्ष लगातार तेज होने से सुरक्षा स्थिति भी बिगड़ती जा रही है।
गौरतलब है कि ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने बड़ा सैन्य हमला किया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। अधिकारियों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 397 और इजराइल में 11 लोगों के मारे जाने की खबर है।
जयशंकर ने कहा कि भारत ने 28 फरवरी को जारी बयान में ही सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, “हम मानते थे और मानते रहेंगे कि तनाव कम करने और मूल मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।”
विदेश मंत्री ने बताया कि संघर्ष के कारण प्रभावित क्षेत्र से अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय का कल्याण और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है, वहीं ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार जैसे राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्षेत्र के घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और संबंधित मंत्रालय स्थिति से निपटने के लिए आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से बातचीत कर भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया है।
जयशंकर ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी क्षेत्र के कई देशों के विदेश मंत्रियों से संपर्क बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 28 फरवरी और 5 मार्च 2026 को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत की और आने वाले दिनों में यह संपर्क जारी रहेगा।
ईरानी जहाज को भारतीय बंदरगाह पर खड़ा करने के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान ने 28 फरवरी को अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर ठहरने की अनुमति मांगी थी, जिसे एक मार्च को मानवीय आधार पर मंजूरी दे दी गई। इसके तहत आइरिस लवन नामक जहाज चार मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर पहुंचा और उसका चालक दल फिलहाल भारतीय नौसैनिक केंद्र में है।
ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए सरकार स्थिति पर करीबी नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर भारतीय कूटनीति ऊर्जा कंपनियों के प्रयासों का समर्थन कर रही है।
हालांकि, जब जयशंकर संसद में अपना वक्तव्य देने के लिए खड़े हुए तो विपक्षी दलों ने जोरदार नारेबाजी की और मांग की कि पहले इस मुद्दे पर चर्चा कराई जाए। हंगामे के बीच राज्यसभा से विपक्ष ने वॉकआउट किया, जबकि लोकसभा में लगातार विरोध के कारण सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि विदेश मंत्रालय और पश्चिम एशिया के देशों में स्थित भारतीय दूतावास वहां मौजूद भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं और उन्हें नियमित परामर्श जारी किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने स्थिति पर नजर रखने और नागरिकों की सहायता के लिए एक विशेष नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है।
