कांग्रेस का आरोप—चुनावों से पहले अरविंद केजरीवाल को ‘वाशिंग मशीन’ से निकाल कर पेश कर रही भारतीय जनता पार्टी

नई दिल्ली, 27 फरवरी। कथित आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को अदालत से राहत मिलने के बाद कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख केजरीवाल को “नहला-धुलाकर और वाशिंग मशीन से निकालकर” पेश कर रही है, ताकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को कमजोर किया जा सके।

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा का मुख्य उद्देश्य “कांग्रेस मुक्त भारत” बनाना है और इसी रणनीति के तहत वह राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अपने रुख बदलती रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात और पंजाब में चुनावी माहौल बनने के साथ ही राजनीतिक घटनाक्रमों की दिशा भी उसी अनुरूप तय की जा रही है।

खेड़ा ने कहा कि भाजपा एक “इच्छाधारी नाग” की तरह व्यवहार करती है, जिसका लक्ष्य केवल कांग्रेस को हराना है। उनके अनुसार, विभिन्न राजनीतिक दलों और व्यक्तियों के प्रति भाजपा का रुख समय-समय पर बदलता रहा है और यह बदलाव चुनावी हितों से प्रेरित होता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामलों में चुनाव से पहले अचानक तेजी दिखाई देती है, जबकि अन्य दलों से जुड़े मामलों में कार्रवाई धीमी पड़ जाती है।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भी घटनाक्रम के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि अदालत के फैसले ऐसे समय में सामने आए हैं जब कई राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह संयोग मात्र नहीं माना जा सकता और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में इसकी समीक्षा जरूरी है।

यह प्रतिक्रिया उस फैसले के बाद आई जिसमें दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दाखिल आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार करते हुए अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि आरोपपत्र में कई ऐसी कमियां हैं जिनका उपलब्ध साक्ष्यों से समुचित मेल नहीं बैठता।

अदालत की टिप्पणी और आरोपियों को मिली राहत के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां कांग्रेस इस घटनाक्रम को चुनावी रणनीति से जोड़कर देख रही है, वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों के मद्देनजर राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तीखी होने की संभावना है। अदालत के फैसले के बाद उभरे राजनीतिक बयान इस बात का संकेत देते हैं कि आने वाले समय में चुनावी विमर्श और अधिक आक्रामक हो सकता है।

कुल मिलाकर, न्यायिक फैसले के बाद शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी ने चुनावी परिदृश्य को नया आयाम दे दिया है और विभिन्न दल अपनी-अपनी राजनीतिक व्याख्याओं के साथ जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने में जुट गए हैं।

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