25 मार्च तक भूसा टेंडर पूरा करें, गो आश्रय स्थलों में गर्मी से बचाव के पुख्ता इंतजाम हों: धर्मपाल सिंह

नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम में तेजी के निर्देश, बजट खर्च में लापरवाही पर सख्ती

लखनऊ, 18 मार्च 2026, RNN : उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी जनपदों में 25 मार्च, 2026 तक भूसे से संबंधित टेंडर प्रक्रिया हर हाल में पूरी कर ली जाए। उन्होंने रबी फसल की कटाई को ध्यान में रखते हुए वर्षभर पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

विधान भवन स्थित कार्यालय में गौ आश्रय स्थलों की समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि आगामी गर्मी और लू को देखते हुए सभी गो आश्रय स्थलों पर स्वच्छ पेयजल, चारा और त्रिपाल जैसी जरूरी व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित की जाएं, ताकि निराश्रित गोवंश को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट उपयोग की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आवंटित बजट का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए और किसी भी स्थिति में बजट सरेंडर न होने पाए। उन्होंने चेतावनी दी कि योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने प्रदेश में नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम और बकरी पालन जैसी लाभार्थीपरक योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि पशुचिकित्साधिकारी नियमित रूप से गो आश्रय स्थलों का निरीक्षण करें और गोवंश के स्वास्थ्य, उपचार व दवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें। जहां भी अव्यवस्था की शिकायत मिले, वहां तत्काल सुधार किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, इसलिए गौ संरक्षण केंद्रों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव पशुधन मुकेश मेश्राम ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 469 वृहद गो संरक्षण केंद्रों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि 30 केंद्रों का लोकार्पण प्रस्तावित है। साथ ही 130 निर्माणाधीन केंद्रों को 15 मई, 2026 तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में पीसीडीएफ के एमडी वैभव श्रीवास्तव, डॉ. मेमपाल सिंह, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और डॉ. पी.के. सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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