मुख्यमंत्री धामी ने पेश किया 1.11 लाख करोड़ रुपये का बजट, समावेशी विकास पर जोर

गैरसैंण, 9 मार्च । उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। वित्त मंत्री के रूप में धामी का यह पहला बजट है और इसे राजस्व अधिशेष वाला बजट बताया गया है। बजट में 2,536.33 करोड़ रुपये के राजस्व अधिशेष का अनुमान लगाया गया है।

राज्य सरकार का यह बजट पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक है। बजट में 64,989.44 करोड़ रुपये राजस्व व्यय और 46,713.73 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया गया है। वहीं पूंजीगत प्राप्तियों से 42,617.35 करोड़ रुपये तथा राजस्व प्राप्तियों से 67,525.77 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान जताया गया है।

मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि यह बजट समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता, नई सोच, तीव्र विकास, उन्नत गांव और शहर, लोक सहभागिता, आर्थिक सशक्तिकरण और न्यायपूर्ण व्यवस्था की अवधारणा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य गरीब, युवा, किसान और नारी सशक्तीकरण को केंद्र में रखकर राज्य के समग्र विकास को आगे बढ़ाना है।

बजट में वित्तीय जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखते हुए एफआरबीएम (FRBM) के प्रावधानों का पालन किया गया है। राज्य का राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के तीन प्रतिशत की सीमा के भीतर रखा गया है, जो 12,579.70 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही राज्य का ऋण भी राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के 32.50 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के अंदर रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल के राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने पहली बार स्वयं विधानसभा में पूर्ण बजट पेश किया है।

इस बीच, राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में शुरू हुए बजट सत्र के पहले दिन विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायकों ने जोरदार हंगामा किया। राज्यपाल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस विधायकों ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर नारेबाजी की और लगभग 15 मिनट तक सदन में विरोध प्रदर्शन किया। बाद में विपक्षी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।

हालांकि मुख्यमंत्री के बजट भाषण के दौरान विपक्षी सदस्य पुनः सदन की कार्यवाही में शामिल हुए। इससे पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर के मुख्य द्वार पर धरना दिया और राज्य में बेरोजगारी, बिगड़ती कानून-व्यवस्था समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध जताया।

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