नई दिल्ली, 10 मार्च । केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक गैस के आवंटन नियमों में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस (पीएनजी) को अन्य सभी क्षेत्रों की तुलना में पहली प्राथमिकता दी जाएगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी करते हुए गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को मिलने वाली गैस का आवंटन प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्रों की ओर मोड़ने का निर्णय लिया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण भारत की करीब एक-तिहाई गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत की कुल गैस खपत लगभग 19.1 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन है, जिसका लगभग आधा हिस्सा आयात के जरिये पूरा किया जाता है। रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने से पश्चिम एशिया से आने वाली लगभग छह करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन गैस आपूर्ति बाधित हो गई है।
नई व्यवस्था के तहत उपलब्ध तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया गया है ताकि एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पीएनजी की मांग का 100 प्रतिशत पूरा किया जा सके। इसके साथ ही वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की करीब 80 प्रतिशत और उर्वरक इकाइयों की लगभग 70 प्रतिशत जरूरत पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और प्रमुख क्षेत्रों की मांग पूरी करने के लिए गैस आवंटन को नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति मिलती रहे और अन्य उद्योगों को भी उनकी जरूरत का 70 से 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए किसी तरह की कमी नहीं है और घबराने की जरूरत नहीं है।
सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन उपायों के बाद उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
अधिसूचना के मुताबिक, इस नई व्यवस्था को लागू करने और गैस आपूर्ति के प्रबंधन की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड को दी गई है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में सरकार का यह कदम घरेलू उपभोक्ताओं और जरूरी क्षेत्रों में ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा।
