लखनऊ, 31 मार्च (RNN)। मायावती ने मंगलवार को कहा कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन ‘बहुजन सरकार’ के बिना संभव नहीं है। उन्होंने सत्ताधारी सरकारों पर इन प्रावधानों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
यहां बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश कार्यालय में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें आरक्षण व्यवस्था को ‘अप्रभावी और निष्क्रिय’ बना रही हैं।
उन्होंने हाशिये के समुदायों से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा उपायों को कमजोर किए जाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, ‘‘बहुजन समाज की सरकार के बिना आरक्षण को सही इरादे और नीति के साथ लागू करना असंभव है।’’
पार्टी के एक बयान के अनुसार, मायावती ने बेरोजगारी और गरीबी जैसे गंभीर मुद्दों को हल करने के बजाय खोखले नारों पर निर्भर रहने के लिए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और आर्थिक रूप से पिछड़े राज्य में ‘रोजी-रोटी’ की स्थिति बिगड़ रही है, जबकि सरकारें बयानबाजी और वादों के जरिए लोगों की कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास कर रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकारें नारों और घोषणाओं के माध्यम से भूख, गरीबी और बेरोजगारी से निपटने की कोशिश कर रही हैं।’’
बसपा प्रमुख ने जोर देकर कहा कि ‘आत्मनिर्भरता सिर्फ एक नारा बनकर नहीं रह सकती’ और इसे ईमानदारी से लागू किया जाना चाहिए, ताकि सभी को रोजगार मिले और बहुजन समुदाय के जीवन स्तर में सुधार हो।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या निजी क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से सच्ची आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सकती है, और इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार-विमर्श करने का आह्वान किया।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव सहित वैश्विक घटनाक्रमों के बीच बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त करते हुए मायावती ने कहा कि ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती लागत गरीबों और श्रमिक वर्गों की समस्याओं को और बढ़ा रही है। उन्होंने सरकार से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और नोटबंदी तथा कोविड-19 महामारी जैसे संकटों से सबक लेते हुए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश में विकास समावेशी नहीं है और यह ‘मुट्ठीभर सत्ताधारी अभिजात्य वर्ग’ तक सीमित होकर रह गया है, जिससे व्यापक आबादी को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
‘बहुजन-उन्मुख विकास मॉडल’ की आवश्यकता पर जोर देते हुए मायावती ने कहा कि देश को गरीबों के कल्याण और रोजगार सृजन पर केंद्रित नीतियों की जरूरत है।
बैठक के दौरान उन्होंने संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा की और पार्टी नेताओं को आगामी चुनावों से पहले जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने तथा जनाधार का विस्तार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से 14 अप्रैल को भीमराव आंबेडकर की जयंती पूरे उत्साह और निष्ठा के साथ मनाने का आग्रह किया और उत्तर प्रदेश भर के समर्थकों से लखनऊ में आंबेडकर स्मारक पर एकत्र होकर श्रद्धांजलि अर्पित करने का आह्वान किया।
