देबरा (पश्चिम बंगाल), 30 मार्च (UNS)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को अपने चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल विधानसभा चुनाव को पहचान की लड़ाई बताते हुए कहा कि चुनाव जीतने के बाद उनकी पार्टी ‘‘दिल्ली पर कब्जा’’ करने की दिशा में काम करेगी।
पश्चिम मेदिनीपुर जिले के देबरा में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव को केवल सत्ता का मुकाबला नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा राज्य को राजनीतिक, सांस्कृतिक और चुनावी रूप से नियंत्रित करने के प्रयासों के खिलाफ संघर्ष बताया।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा,
“पश्चिम बंगाल में जीत के बाद, हम दिल्ली पर कब्जा करने के लिए पूरे देश को एकजुट करेंगे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग राज्य सरकार को कमजोर करने और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा,
“दिल्ली के जमींदारों ने मेरे हाथों से सारी शक्तियां छीन ली हैं।”
ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि लाखों पात्र मतदाताओं, खासकर महिलाओं और बांग्ला भाषी लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने लोगों से ऑनलाइन जांच कर आवेदन करने की अपील करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने दावा किया कि अभी भी लगभग 60 लाख नाम व्यवस्था संबंधी खामियों के दायरे में हैं और यदि इनमें से 50 प्रतिशत नाम भी बहाल हो जाते हैं, तो इसका श्रेय उनकी पार्टी की कानूनी लड़ाई को जाएगा।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर खान-पान और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दे को चुनावी हथियार बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा,
“बंगाल के खान-पान को लेकर ये लोग इतने जुनूनी क्यों हैं? ये लोगों को मछली, मांस और अंडा न खाने की बात करते हैं। आखिर ये लोगों से क्या खाने की उम्मीद करते हैं?”
ममता बनर्जी ने भाजपा पर बंगाल के महापुरुषों ईश्वर चंद्र विद्यासागर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, राजा राममोहन राय और खुदीराम बोस का अनादर करने का भी आरोप लगाया।
