लखनऊ, 17 फरवरी 2026। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे विवादों का न्यायालयों तक पहुँचने से पहले ही समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सामुदायिक मध्यस्थता आधारित एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बागपत के सहयोग से “सामुदायिक मध्यस्थता: वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर” शीर्षक पायलट परियोजना का शुभारंभ किया।
परियोजना का उद्घाटन न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने किया, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष भी हैं। उद्घाटन समारोह में न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, मध्यस्थों, परा विधिक स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
इस पहल का मूल उद्देश्य ग्रामीण समाज में उत्पन्न होने वाले छोटे दीवानी, पारिवारिक, पड़ोसी तथा भूमि संबंधी विवादों को संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से सुलझाना है। परियोजना “वाद-मुक्त गाँव” की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक संगठित प्रयास मानी जा रही है। इसके तहत प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थ स्वैच्छिक और गोपनीय प्रक्रिया के माध्यम से विवादों का समाधान करेंगे, जिससे मुकदमेबाजी में लगने वाला समय, धन और सामाजिक तनाव कम किया जा सकेगा।

अपने उद्घाटन संबोधन में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि ग्रामीण समाज में विवादों का समाधान समुदाय आधारित संवाद से अधिक प्रभावी और टिकाऊ हो सकता है। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता अधिनियम, 2023 ने मध्यस्थता को विधिक मान्यता प्रदान की है, जिससे पारंपरिक भारतीय विवाद समाधान प्रणाली को आधुनिक कानूनी ढाँचे का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया निष्पक्षता, गोपनीयता और तटस्थता के सिद्धांतों पर आधारित होती है, जो न्याय तक समान और सुलभ पहुँच सुनिश्चित करती है।
परियोजना के अंतर्गत बागपत जिला के छह गाँवों को पायलट क्रियान्वयन के लिए चयनित किया गया है। राष्ट्रीय और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण स्थानीय समुदाय के सम्मानित व्यक्तियों—जैसे सेवानिवृत्त शिक्षक, वरिष्ठ नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं—की पहचान कर उन्हें मध्यस्थता का विशेष प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षित मध्यस्थ औपचारिक न्याय प्रणाली और समाज के बीच सेतु के रूप में कार्य करेंगे और संवाद आधारित समाधान की संस्कृति को बढ़ावा देंगे।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य सामाजिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण समुदायों का निर्माण करना है, जो प्रारंभिक स्तर पर ही विवादों को सुलझाने में सक्षम हों। बागपत में शुरू की गई यह पायलट परियोजना भविष्य में देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किए जाने योग्य मॉडल के रूप में विकसित की जाएगी।
इस अवसर पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. मनु कलिया ने ग्रामीण नागरिकों से अपील की कि वे छोटे विवादों को न्यायालय तक ले जाने के बजाय सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से समाधान का मार्ग अपनाएं। उन्होंने कहा कि यह पहल न्याय व्यवस्था पर बोझ कम करने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को मजबूत करेगी।
