गुवाहाटी, 21 फरवरी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 की समयसीमा तक देश से नक्सलवाद का पूर्ण खात्मा कर दिया जाएगा। वे यहां आयोजित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 87वें स्थापना दिवस परेड समारोह को संबोधित कर रहे थे।
शाह ने कहा कि देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने में सीआरपीएफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने बताया कि कभी 12 राज्यों और अनेक जिलों में फैले नक्सलवाद को समाप्त करने के संकल्प में सीआरपीएफ और कोबरा बल के जवानों ने निर्णायक योगदान दिया है। उनके अनुसार कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद सुरक्षा बलों ने संगठित रणनीति से माओवादी नेटवर्क को कमजोर किया है।
गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुटा पहाड़ियों में अप्रैल-मई 2025 के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ का उल्लेख करते हुए कहा कि 21 दिन तक चले इस अभियान में 31 नक्सली मारे गए और उनके रणनीतिक अड्डों को ध्वस्त किया गया। उन्होंने जवानों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि “लाल आतंक” से देश को मुक्त कराने में सीआरपीएफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र और पूर्वोत्तर—ये तीनों क्षेत्र कभी आंतरिक सुरक्षा की बड़ी चुनौती थे, लेकिन अब इन क्षेत्रों में शांति और विकास का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं समाप्त हो चुकी हैं और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि हो रही है।
समारोह के दौरान 14 जवानों को वीरता के लिए पुलिस पदक और पांच जवानों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा बल की पांच बटालियनों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम सरुसजाई स्टेडियम में आयोजित किया गया, जहां देश भर से चयनित सीआरपीएफ की आठ टुकड़ियों ने औपचारिक परेड में भाग लिया। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
गृह मंत्री ने कहा कि 1939 में दो बटालियनों से शुरू हुआ सीआरपीएफ आज 248 बटालियनों और लाखों कर्मियों के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है। उन्होंने देश की सुरक्षा में बल के 2,270 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
