पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने रिफाइनरियों पर लगाया एस्मा, एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश

नयी दिल्ली, 6 मार्च । पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और संभावित आपूर्ति बाधा को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत ‘एस्मा’ कानून की आपातकालीन शक्तियों का उपयोग किया है, ताकि देश में रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा पांच मार्च को जारी आदेश में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सभी रिफाइनरियों से कहा गया है कि वे उत्पादन प्रक्रिया में निकलने वाली प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का अधिकतम उपयोग एलपीजी बनाने में करें। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन गैसों का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण में नहीं किया जाएगा।

एलपीजी दरअसल प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण है और देश में इसका उपयोग मुख्य रूप से घरेलू रसोई गैस के रूप में किया जाता है। सरकार ने रिफाइनरियों को यह भी निर्देश दिया है कि उत्पादित एलपीजी केवल तीन सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल (आईओसी), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल)—को ही उपलब्ध कराई जाए।

सरकार का यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। भारत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत एलपीजी आयात सऊदी अरब सहित पश्चिम एशियाई देशों से होता है और इन आपूर्तियों के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।

आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की कुल एलपीजी खपत 3.13 करोड़ टन रही, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर हुआ, जबकि शेष मात्रा का आयात किया गया।

मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि रिफाइनिंग कंपनियां प्रोपेन या ब्यूटेन का उपयोग न तो पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण में करेंगी और न ही उनका प्रसंस्करण, क्रैकिंग या अन्य रूपांतरण करेंगी। इन गैसों से तैयार होने वाली एलपीजी केवल घरेलू उपभोक्ताओं को खाना पकाने के उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में देश में 33.08 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं और सरकार की प्राथमिकता रसोई गैस की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है।

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