नयी दिल्ली की एक अदालत ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार उदय भानु चिब को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को केवल अनुमानों के आधार पर उसकी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि जमानत आदेश के बाद अदालत ने प्रस्तुत दस्तावेजों और मुचलके के सत्यापन तक उन्हें रविवार सुबह तक न्यायिक हिरासत में रहने का निर्देश दिया।
चिब को उनकी चार दिन की पुलिस हिरासत समाप्त होने के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट वंशिका मेहता के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने दिल्ली पुलिस की हिरासत अवधि बढ़ाने की मांग खारिज करते हुए कहा कि जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय संविधान की आत्मा है और “जमानत नियम है, कारावास अपवाद।”
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी पुलिस हिरासत की अतिरिक्त आवश्यकता के ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर पाए। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि आरोपी का समाज में स्थापित आधार है और उसके फरार होने की आशंका नहीं है। अदालत ने कहा कि दोषी होना या न होना मुकदमे का विषय है, जबकि इस स्तर पर केवल यह देखा जाना आवश्यक है कि हिरासत जरूरी है या नहीं।
चिब को 50 हजार रुपये का मुचलका भरने, पासपोर्ट जमा करने और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जांच एजेंसियों को सौंपने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कानूनी आधार आवश्यक है, विशेषकर तब जब आरोपी जांच में सहयोग कर रहा हो।
मामले के सह-आरोपी भूदेव शर्मा को अदालत ने तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। अदालत के अनुसार वह प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे और जांच प्रारंभिक चरण में होने के कारण उनकी हिरासत आवश्यक है।
यह मामला भारत मंडपम में आयोजित एआई सम्मेलन के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जहां भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों ने कथित तौर पर नारे लिखी टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया था। घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा कर्मियों के बीच झड़प की भी सूचना सामने आई थी। जांच अभी जारी है।
