नयी दिल्ली, 9 नवंबर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूटान द्वारा भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के श्रद्धापूर्ण स्वागत के लिए वहां की जनता और नेतृत्व की सराहना की है। उन्होंने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं भारत और भूटान के बीच एक पवित्र आध्यात्मिक कड़ी हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती प्रदान करती हैं।
भारत से ले जाए गए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का एक अंश शनिवार को भूटान की राजधानी थिम्पू स्थित ताशिछोद्जोंग मठ में स्थापित किया गया। यह मठ भूटान की सर्वोच्च आध्यात्मिक और राजनीतिक संस्थाओं का केंद्र माना जाता है।
थिम्पू में आयोजित प्रतिष्ठापन समारोह में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, वहां के वरिष्ठ मंत्री, केंद्रीय मठ निकाय के लोपेन और भारत के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने भाग लिया। समारोह के दौरान पारंपरिक चिपड्रेल जुलूस, प्रार्थना, अनुष्ठान और गार्ड ऑफ ऑनर का आयोजन किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत से ले जाए गए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के प्रति भूटान के लोगों और नेतृत्व द्वारा प्रदर्शित श्रद्धा और सम्मान के लिए हार्दिक आभार।” उन्होंने आगे कहा कि ये अवशेष शांति, करुणा और सद्भाव के शाश्वत संदेश के प्रतीक हैं और भगवान बुद्ध की शिक्षाएं भारत-भूटान की साझा आध्यात्मिक विरासत को जोड़ती हैं।
थिम्पू स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, इन पवित्र अवशेषों को ताशिछोद्जोंग के ग्रैंड कुएनरे हॉल में स्थापित किया गया है। संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि ये अवशेष 8 से 18 नवंबर तक सार्वजनिक दर्शन और पूजा के लिए रखे जाएंगे। मंत्रालय ने कहा कि यह आयोजन भारत और भूटान के बीच गहरी आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है।
ताशिछोद्जोंग का ग्रैंड कुएनरे हॉल भूटान के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां स्थापित किए गए अवशेषों को “भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष” कहा जाता है, जिन्हें नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया था।
प्रधानमंत्री मोदी आगामी मंगलवार से दो दिवसीय भूटान यात्रा पर जाएंगे, जहां वे इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध को और सुदृढ़ करने के लिए भूटानी नेतृत्व से मुलाकात करेंगे।
