जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल न होने पर दी इस्तीफे की चेतावनी

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए चेतावनी दी है कि अगर राज्य का पूर्ण दर्जा तय समय सीमा के भीतर बहाल नहीं किया गया, तो वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा कि उनका पद राज्य के दर्जे से सीधा जुड़ा हुआ है और “राज्य की गरिमा के बिना मुख्यमंत्री पद का कोई अर्थ नहीं है।”

रविवार को एक मीडिया समूह को दिए साक्षात्कार में उमर अब्दुल्ला ने कहा, “राज्य का दर्जा बहाल करना राजनीतिक ईमानदारी और जनता के विश्वास का सवाल है। यदि यह तय अवधि के भीतर नहीं हुआ तो मैं पद पर बने रहने का औचित्य नहीं देखता।” हालांकि उन्होंने कोई निश्चित डेडलाइन घोषित नहीं की।

केंद्र पर दबाव बनाने की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब नगरोटा और बडगाम में उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है और पार्टी के भीतर भी उनसे सख्त रुख अपनाने की मांग हो रही है।

नेकां सांसद आगा रुहुल्ला मेहदी ने मुख्यमंत्री पर वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “लोगों ने हमें सरकार इसलिए नहीं चुना कि हम केंद्र से रिश्ते मजबूत करें, बल्कि इसलिए कि हम 2019 से पहले की स्थिति को बहाल कर सकें।”

कांग्रेस भी सड़कों पर

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद नेकां की सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने भी राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार जानबूझकर इस मुद्दे को टाल रही है।

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि “जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा उचित समय पर वापस दिया जाएगा।” लेकिन उमर अब्दुल्ला के ताजा बयान से राजनीतिक माहौल में नई हलचल पैदा हो गई है।

विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद आगामी उपचुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं, जम्मू-कश्मीर मामलों के जानकार एमाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाया, “नेकां को 31 साल शासन करने का मौका मिला, लेकिन आम लोगों के जीवन में क्या बदलाव आया? उस दौर में भी पार्टी अपनी नाकामियों के लिए केंद्र को दोष देती रही।”

उमर अब्दुल्ला के बयान से यह साफ है कि आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर की राजनीति एक बार फिर राज्य के दर्जे की बहाली के मुद्दे पर केंद्रित रहेगी।

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