बॉलीवुड के दिग्गज कॉमेडियन असरानी का निधन, ‘शोले’ के जेलर से लेकर 350 फिल्मों तक का रहा सुनहरा सफर

मुंबई, 20 Oct 2025: बॉलीवुड के मशहूर चरित्र अभिनेता और कॉमेडियन असरानी का आज निधन हो गया। 84 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने पांच दशक लंबे फिल्मी करियर में असरानी ने करीब 350 फिल्मों में काम किया और हिंदी सिनेमा के सबसे भरोसेमंद सपोर्टिंग एक्टर्स में अपनी पहचान बनाई। उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। खासकर फिल्म शोले में उनका “अंग्रेजों के ज़माने के जेलर” वाला किरदार आज भी भारतीय सिनेमा के आइकॉनिक रोल्स में गिना जाता है।

जयपुर से बॉलीवुड तक का सफर

असरानी का पूरा नाम गोवर्धन असरानी था। उनका जन्म 1 जनवरी 1941 को राजस्थान के जयपुर में हुआ। उनके पिता एक कारोबारी थे, लेकिन असरानी का झुकाव कला की ओर था। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में वॉयस ओवर आर्टिस्ट के रूप में काम करना शुरू कर दिया था। अभिनय की बारीकियां उन्होंने 1960 से 1962 तक कलाभाई ठक्कर से सीखीं। इसके बाद 1964 में पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में दाखिला लिया।

फिल्मी करियर की शुरुआत

असरानी को पहला ब्रेक फिल्म हरे कांच की चूड़ियां (1967) में मिला, जिसमें उन्होंने बिश्वजीत के दोस्त का किरदार निभाया। शुरुआती वर्षों में उन्हें खास पहचान नहीं मिली, लेकिन 1969 में ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म सत्यकाम से उन्हें नई दिशा मिली। इसके बाद मेरे अपने, बावर्ची, अभिमान, कोशिश और नमक हराम जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।

राजेश खन्ना के खास दोस्त

राजेश खन्ना के साथ उनकी दोस्ती भी जगजाहिर रही। नमक हराम के बाद दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी। राजेश खन्ना अक्सर अपने निर्माताओं से कहते थे कि असरानी को भी फिल्म में शामिल किया जाए। दोनों ने साथ में करीब 25 फिल्मों में काम किया।

कॉमेडी में बनाई खास जगह

असरानी ने 1970 और 80 के दशक में कई यादगार कॉमिक रोल्स किए। चुपके चुपके, रफू चक्कर, छोटी सी बात, पति पत्नी और वो, फकीरा, हीरा लाल पन्नालाल, दिल्लगी और शोले जैसी फिल्मों में उनका हास्य किरदार लोगों को गुदगुदाता रहा। हालांकि, उन्होंने खून पसीना जैसी फिल्मों में गंभीर किरदार भी निभाए।

निर्देशन और निजी जीवन

1974 में असरानी ने एक गुजराती फिल्म का निर्देशन किया जिसमें उन्होंने खुद लीड रोल भी निभाया। 1982 में उन्होंने एक प्रोडक्शन हाउस शुरू किया जो बाद में काफी सफल रहा। अभिनय के दौरान ही उन्हें अभिनेत्री मंजू बंसल से प्यार हुआ और दोनों ने विवाह किया। दोनों ने साथ में हम नहीं सुधरेंगे, चांदी सोना और नालायक जैसी फिल्मों में काम किया।

2000 के दशक में भी दिखा जलवा

2000 के बाद भी असरानी फिल्मों में सक्रिय रहे। हेरा फेरी, हलचल, गरम मसाला, चुप चुप के, भागम भाग और मालामाल वीकली जैसी हिट फिल्मों में उनकी मौजूदगी दर्शकों को खूब पसंद आई।

विदाई एक सितारे की

असरानी के निधन से बॉलीवुड में शोक की लहर है। वे उन कलाकारों में से थे जिन्होंने हर पीढ़ी के दर्शकों को अपने अभिनय से प्रभावित किया। उनका जाना भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत है।

उनकी विरासत आने वाले कलाकारों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 🕊️

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