श्रीसन फार्मा का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, बच्चों की मौत के पीछे निकली लापरवाही और धोखाधड़ी

MP कफ सिरप केस: मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत का कारण बने जहरीले कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। इस गंभीर मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट में सामने आया है कि श्रीसन फार्मा नामक दवा कंपनी ने बिना किसी लैब टेस्टिंग के ही यह सिरप बाजार में बेच दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी की लापरवाही और नियमों की धज्जियां उड़ाने की वजह से कई मासूम बच्चों की जान चली गई।

केमिकल एनालिस्ट के. माहेश्वरी ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि कंपनी में लैब टेस्टिंग की सुविधाएं पर्याप्त नहीं थीं और कोल्ड्रिफ सिरप की कोई भी परीक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी। SIT सूत्रों के अनुसार, केवल कुछ चुनिंदा दवाओं की औपचारिक जांच होती थी, जबकि बाकी दवाएं—including कोल्ड्रिफ—बिना किसी गुणवत्ता परीक्षण के सीधे बाजार में भेज दी जाती थीं।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि ड्रग डिपार्टमेंट की ओर से कंपनी का कोई नियमित निरीक्षण नहीं किया गया। यह भी स्पष्ट हो गया है कि विभागीय लापरवाही इस घटना का एक अहम कारण है, जो सरकारी सिस्टम पर भी सवाल खड़े करता है।

SIT ने इस केस में फैक्ट्री मालिक रंगनाथन और केमिकल एनालिस्ट माहेश्वरी से आमने-सामने पूछताछ की। इसके लिए टीम रंगनाथन को तमिलनाडु भी लेकर गई थी, जहां से दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए गए। पूछताछ के दौरान दोनों को आमने-सामने बैठाकर उन विसंगतियों को लेकर सवाल पूछे गए, जिनसे इस मौत की त्रासदी जुड़ी हुई है।

तीन दिन की रिमांड पूरी होने के बाद माहेश्वरी को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया। वहीं, फैक्ट्री मालिक रंगनाथन की रिमांड 20 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है।

यह मामला अब एक महज मेडिकल लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक लापरवाही और धोखाधड़ी का बन चुका है, जिसमें मासूम बच्चों की जानें गई हैं। SIT की रिपोर्ट और पूछताछ से यह साबित होता है कि कैसे एक कमजोर सिस्टम, सरकारी निगरानी की कमी और निजी लालच ने एक बड़ी जनहानि को जन्म दिया।

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