लेह हिंसा की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी.एस. चौहान के नेतृत्व में न्यायिक जांच के आदेश

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर :केंद्र सरकार ने लद्दाख के लेह शहर में 24 सितंबर को हुई हिंसा की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस जांच का नेतृत्व भारत के उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डॉ. बी.एस. चौहान करेंगे।

इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 से अधिक लोग घायल हुए थे। झड़पें तब हुई थीं जब प्रदर्शनकारी लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत विशेष संवैधानिक दर्जा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

गृह मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह न्यायिक जांच उन परिस्थितियों की पड़ताल करेगी, जिनके चलते कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई, पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी और इसके नतीजे में चार लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हुई।

सरकार ने इस कदम को “निष्पक्ष जांच” की दिशा में एक प्रयास बताया है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार बातचीत के लिए हमेशा तैयार रही है और भविष्य में भी एपेक्स बॉडी लेह (ABL) तथा कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) जैसे प्रतिनिधि संगठनों के साथ संवाद के माध्यम से समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है।

बयान में कहा गया, “हमें विश्वास है कि निरंतर बातचीत के माध्यम से निकट भविष्य में वांछित परिणाम प्राप्त होंगे। सरकार लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं और संवैधानिक अधिकारों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

24 सितंबर को लेह में हिंसा उस समय भड़क उठी थी जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारी लद्दाख के लिए संवैधानिक गारंटी की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में चार लोगों की जान चली गई और कई घायल हुए।

घटना के दो दिन बाद, प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें जोधपुर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई की कई मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निंदा की थी।

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