नई दिल्ली, 11 अक्टूबर — चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की वकालत करने वाले संगठन ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) ने शनिवार को उन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि उसने उच्चतम न्यायालय में झूठा हलफनामा दाखिल किया है।
एडीआर ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि विवादित दस्तावेज कोई औपचारिक हलफनामा नहीं था, बल्कि वह केवल न्यायालय की पीठ द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में “प्रस्तुत” किया गया था।
यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के वकील ने एडीआर के हलफनामे में गंभीर त्रुटियों का उल्लेख किया। आयोग के अनुसार, जिस मतदाता का हवाला एडीआर ने दिया, वह मतदाता सूची में मौजूद नहीं था या उसका EPIC नंबर गलत था।
हालांकि, एडीआर ने इन दावों को “गलत और भ्रामक” करार दिया। संगठन ने कहा कि उन्होंने जिस मतदाता की जानकारी प्रस्तुत की थी, उसकी सत्यता चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद है, और इन विवरणों की पुष्टि EPIC नंबर के ज़रिए की जा सकती है।
एडीआर ने संबंधित स्क्रीनशॉट साझा करते हुए बताया कि मतदाता का नाम जनवरी 2025 में प्रकाशित “मसौदा सूची-2025” और “SIR मसौदा 2025” दोनों में शामिल था, जो चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
संगठन ने उन खबरों पर भी चिंता जताई जिनमें कहा गया था कि सात अक्टूबर की सुनवाई के बाद संबंधित मतदाता को बुलाया और धमकाया गया। एडीआर ने चेताया कि ऐसा रवैया भविष्य में मतदाताओं में डर और अविश्वास पैदा कर सकता है और वे सार्वजनिक रूप से समस्याएं उठाने से कतराएंगे।
एडीआर ने दोहराया कि वह सटीकता और पारदर्शिता के मूल्यों पर कायम है और न्यायिक प्रक्रिया में पूरी निष्ठा से शामिल है।
