नई दिल्ली, 10 अक्टूबर — केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची में घुसपैठियों का शामिल होना संविधान की भावना को दूषित करता है, और मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को ही मिलना चाहिए।
वह ‘घुसपैठ, जनसांख्यिकीय बदलाव और लोकतंत्र’ विषय पर आयोजित एक व्याख्यान में बोल रहे थे। यह आयोजन दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन की स्मृति में किया गया था।
शाह ने कहा कि केंद्र सरकार “पता लगाने, हटाने और निर्वासित करने” की नीति के तहत अवैध घुसपैठियों से निपटेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर को राजनीतिक चश्मे से देखने की बजाय इसे राष्ट्रहित से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे केवल अपने वोट बैंक की राजनीति के चलते इसका विरोध कर रहे हैं।
गृह मंत्री ने कहा, “स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तभी संभव हैं जब मतदाता सूची शुद्ध हो, जिसमें केवल उन्हीं का नाम हो जो भारतीय नागरिक हैं और जिन्होंने निर्धारित आयु पूरी कर ली है।”
शाह ने शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच फर्क समझाते हुए कहा कि शरणार्थी धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए भारत आते हैं, जबकि घुसपैठिए आर्थिक या अन्य कारणों से अवैध रूप से सीमा पार करते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर हर कोई भारत आने लगे और उसे अनुमति दे दी जाए, तो यह देश धर्मशाला बन जाएगा।”
कार्यक्रम में गृह मंत्री ने ‘जागरण साहित्य सृजन सम्मान’ भी प्रदान किया, जो हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में मौलिक रचनाओं को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में मतदाता सूचियों की समीक्षा और शुद्धिकरण की प्रक्रिया चल रही है, जिसे चुनाव आयोग जल्द चरणबद्ध रूप से लागू करने जा रहा है।
