टाटा संस का बाजार सूचीकरण पारदर्शिता और विश्वास के लिए जरूरी: शापूरजी पलोनजी मिस्त्री

नई दिल्ली, 10 अक्टूबर — शापूरजी पलोनजी समूह के चेयरमैन शापूरजी पलोनजी मिस्त्री ने शुक्रवार को टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की मांग को दोहराते हुए इसे पारदर्शिता और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए अनिवार्य कदम बताया। उनका यह बयान टाटा ट्रस्ट के भीतर चल रहे आंतरिक विवाद और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित समयसीमा के संदर्भ में आया है।

मिस्त्री ने कहा कि आरबीआई ने टाटा संस को 30 सितंबर 2025 तक सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, और इस निर्देश को नियामकीय गंभीरता के साथ लिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे केवल वित्तीय निर्णय नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी बताया जो संस्थापक जमशेदजी टाटा की पारदर्शिता की भावना के अनुरूप है।

गौरतलब है कि शापूरजी पलोनजी समूह के पास टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है, जिसे बेचकर वह अपने कर्जों का निपटान करना चाहता है। वहीं टाटा ट्रस्ट्स के पास 66% हिस्सेदारी है और वह समूह की रणनीतिक दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

मिस्त्री ने कहा, “टाटा संस का सार्वजनिक सूचीकरण कर्मचारियों, निवेशकों और आम जनता के बीच विश्वास को बढ़ाएगा। पारदर्शिता ही विरासत और भविष्य के प्रति सच्चा सम्मान है।”

उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई, एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था होने के नाते, समानता, न्याय और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर फैसले लेती है। ऐसे में टाटा संस का बाजार में उतरना नियामकीय अपेक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक नैतिकता का भी सवाल है।

मिस्त्री के इस बयान को टाटा समूह में हिस्सेदारी विवाद और ट्रस्ट के भीतर चल रही खींचतान के बीच एक अहम संकेत माना जा रहा है कि वे अब समूह के भविष्य में पारदर्शिता और बाजार की भागीदारी को प्राथमिकता देते देखना चाहते हैं।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *