कांशीराम की पुण्यतिथि पर अखिलेश यादव का भाजपा और बसपा पर हमला, कहा- सामाजिक न्याय की लड़ाई में सपा सबसे आगे

लखनऊ, 9 अक्टूबर  — बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम की 19वीं पुण्यतिथि पर देशभर में जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई, वहीं उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मौके पर एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) और बसपा के बीच तल्खी देखने को मिली। बसपा प्रमुख मायावती द्वारा सपा पर तीखा हमला किए जाने के कुछ ही घंटों बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस वार्ता कर पलटवार किया और भाजपा व बसपा दोनों पर गंभीर आरोप लगाए।

अखिलेश यादव ने कहा कि देश के इतिहास में डॉ. भीमराव आंबेडकर, कांशीराम, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण और मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं ने सामाजिक न्याय की जो राह दिखाई, समाजवादी पार्टी उसी रास्ते पर चलते हुए “पीडीए” — यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों — पर आधारित सरकार बनाना चाहती है।

उन्होंने कहा, “हम सामाजिक न्याय की लड़ाई को और मजबूत करेंगे और पीड़ितों, दलितों व अल्पसंख्यकों को सशक्त बनाएंगे। यही सपा का मूल मंत्र है।”

मायावती के आरोपों पर पलटवार

मायावती द्वारा सपा को “दोगले लोगों की पार्टी” कहे जाने और कांशीराम की पुण्यतिथि पर राजनीति करने का आरोप लगाए जाने पर अखिलेश ने तीखा जवाब देते हुए कहा, “कांशीराम के राजनीतिक जीवन में सपा और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) का बड़ा योगदान रहा है। वे सपा के समर्थन से इटावा से सांसद बने थे। जब सांप्रदायिक ताकतें चरम पर थीं, तब सपा और बसपा ने मिलकर उनका मुकाबला किया था।”

अखिलेश ने दावा किया कि उन्होंने ही लखनऊ में कांशीराम की प्रतिमा की स्थापना करवाई थी और जब बसपा नेताओं ने स्मारक के रखरखाव पर सवाल उठाए थे, तो उन्होंने लखनऊ विकास प्राधिकरण को विशेष निर्देश देकर उसका संरक्षण सुनिश्चित किया था।

समाजवादी पार्टी  प्रमुख अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती पर नाम लिए बिना तीखा हमला बोला है। माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अखिलेश ने इशारों-इशारों में मायावती पर भारतीय जनता पार्टी से “अंदरूनी सांठगांठ” का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा,
“क्योंकि ‘उनकी’ अंदरूनी सांठगांठ है जारी, इसीलिए वो हैं जुल्म करने वालों के आभारी।”

हालांकि उन्होंने सीधे मायावती का नाम नहीं लिया, लेकिन यह टिप्पणी मायावती के हालिया बयान के जवाब में मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस, सपा और भाजपा पर बसपा को चुनावों में हराने के लिए आपसी मिलीभगत और वोट ट्रांसफर कराने का आरोप लगाया था।

भाजपा पर तीखा हमला

अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ भाजपा पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में लखनऊ स्थित अंबेडकर और कांशीराम स्मारकों की हालत खराब हो गई है। उन्होंने कहा, “इन स्मारकों के पत्थरों का रंग काला पड़ चुका है। ऐसा लगता है जैसे भाजपा इन स्मारकों की कीमती जमीन को बेचने की साजिश कर रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “भाजपा हमें गुलाम नहीं, बल्कि मजदूर बनाना चाहती है, जो सिर्फ उनके लिए काम करे। लेकिन अब पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और महिलाएं— सब जागरूक हो चुके हैं। हमारा संघर्ष साझा है और हमारा दर्द भी एक है।”

प्रशासनिक भेदभाव के आरोप

अखिलेश ने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस और प्रशासनिक नियुक्तियों में भी जातीय भेदभाव हो रहा है। उन्होंने रायबरेली में एक दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि यह अकेला मामला नहीं है। “ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इसमें पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है,” उन्होंने कहा।

एनसीआरबी आंकड़ों का हवाला

अखिलेश ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश दलितों और महिलाओं के खिलाफ अपराध में देश में पहले स्थान पर है। उन्होंने भाजपा पर “झूठ बोलने और झूठे मुकदमे दर्ज करने में विश्व रिकॉर्ड” बनाने का आरोप भी लगाया।

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