नई दिल्ली – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस हफ्ते एक अहम यात्रा पर ऑस्ट्रेलिया जा रहे हैं। यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी की पांचवीं वर्षगांठ के मौके पर हो रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और गहरा करने, पनडुब्बी बचाव, समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा उद्योग में साझेदारी को लेकर कई अहम समझौते हो सकते हैं।
यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि यह 2013 के बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की पहली ऑस्ट्रेलिया यात्रा है। रिपोर्टों के अनुसार, राजनाथ सिंह सिडनी में भारतीय फाइटर जेट में ऑस्ट्रेलियाई KC-30A मल्टी-रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट विमान से हवा में ईंधन भरने की प्रक्रिया का निरीक्षण करेंगे। यह सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच नवंबर 2024 में हुए समझौते का हिस्सा है, जिससे भारतीय सैन्य विमानों की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
दोनों देशों के बीच सामुद्रिक निगरानी और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग में पहले से ही मजबूत तालमेल है, क्योंकि दोनों ही P-8I मैरीटाइम सर्विलांस एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करते हैं। अब इस यात्रा के दौरान इस साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, एक नया साझा घोषणापत्र जारी होने की संभावना है, जिसमें द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने का रोडमैप शामिल होगा।
रक्षा उद्योग के क्षेत्र में भी सहयोग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। भारत यह समझना चाहता है कि पानी के नीचे काम करने वाली तकनीकों में माहिर ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के साथ भारतीय कंपनियों का सहयोग कैसे स्थापित किया जा सकता है। समुद्री सुरक्षा, विशेषकर हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त अभियानों को लेकर एक साझा रोडमैप तैयार करने पर भी बातचीत की जा रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग तीन गुना बढ़ा है। 2014 में जहां केवल 11 द्विपक्षीय सैन्य गतिविधियां होती थीं, वहीं 2024 तक यह संख्या 33 पहुंच गई है। राजनाथ सिंह की यह यात्रा रक्षा सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
