अयोध्या, 11 जुलाई। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले पर पहली बार राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को मंदिर प्रशासन के लिए “एक कलंक” बताते हुए कहा कि इस घटना से उन्हें व्यक्तिगत रूप से “छोटापन” और आत्मग्लानि का अनुभव हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।
शनिवार को रामकथा संग्रहालय में आयोजित निर्माण समिति की बैठक में शामिल होने पहुंचे नृपेंद्र मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और ऐसी किसी भी घटना से लोगों का विश्वास प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद यदि व्यवस्था में कोई कमी सामने आती है तो उसे तत्काल दूर किया जाएगा।
‘यह केवल दुख नहीं, आत्ममंथन का विषय’
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि चढ़ावे से जुड़े मामले ने मंदिर प्रशासन से जुड़े सभी लोगों को आत्ममंथन के लिए मजबूर किया है। उनके अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि ऐसी घटना है जिससे पूरे प्रबंधन को आत्मग्लानि महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी तथा तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा।
हाईलेवल जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार
उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता संभवतः एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर रहे हैं। समिति जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेगी। इसके बाद ट्रस्ट उन सुझावों पर विचार कर आवश्यक प्रशासनिक एवं संस्थागत निर्णय लेगा।
सूत्रों के अनुसार, जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा और लेखा-जोखा की प्रक्रिया में कहीं कोई प्रणालीगत कमी तो नहीं रही।
निर्माण कार्य अंतिम चरण में
इसी दौरान राम मंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक में मंदिर परिसर से जुड़े निर्माण कार्यों और उनके औपचारिक हस्तांतरण की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों के अनुसार, मंदिर परिसर के अधिकांश निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं और लगभग सभी परियोजनाओं का हस्तांतरण ट्रस्ट को किया जा चुका है। केवल कुछ तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताएं शेष हैं।
जानकारी के मुताबिक, 15 जुलाई तक प्रमुख निर्माण एजेंसियों की परियोजना संबंधी जिम्मेदारियां समाप्त हो सकती हैं, जिसके बाद मंदिर परिसर का संपूर्ण संचालन ट्रस्ट के अधीन आ जाएगा।
एलएंडटी ने पूरा किया मुख्य निर्माण कार्य
राम मंदिर निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाने वाली एलएंडटी के परियोजना निदेशक वी.के. मेहता ने बताया कि कंपनी द्वारा सौंपे गए सभी प्रमुख निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं। अब केवल हुतात्मा स्मारक का निर्माण शेष है। परिसर के अन्य कार्य उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम और इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के माध्यम से पूरे किए जा रहे हैं।
प्रशासनिक फेरबदल के बीच व्यवस्था की निगरानी
इस बीच ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि पुणे रवाना हो चुके हैं, जबकि अंतरिम महासचिव बनाए गए कृष्णमोहन भी अपने गृह जनपद हरदोई चले गए हैं। उनके जाने के बाद स्थानीय ट्रस्टी दिनेंद्रदास मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। बताया गया कि वे प्रतिदिन मंदिर प्रशासन और अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
चढ़ावा प्रकरण को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के नेता उपेंद्र दत्त शुक्ला ने पोस्टर लगाकर मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाए। इसके जवाब में रायबरेली में विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री राहुल सिंह ने पोस्टर जारी कर कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक हैं और इस विषय को राजनीतिक विवाद का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में सभी की नजरें उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट पर हैं। ट्रस्ट ने संकेत दिया है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या प्रणालीगत कमी सामने आती है तो उसके आधार पर सुधारात्मक और आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में चढ़ावे के प्रबंधन, सुरक्षा और पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। ऐसे समय में, जब राम मंदिर का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है और देश-विदेश से श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, यह मामला केवल प्रशासनिक जवाबदेही ही नहीं, बल्कि आस्था से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता और विश्वास की कसौटी के रूप में भी देखा जा रहा है।
