यूपी का जलालाबाद अब परशुरामपुरी: योगी मंत्रिमंडल की मंजूरी, वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी

लखनऊ, 06 जुलाई (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार ने शाहजहांपुर जिले के ऐतिहासिक कस्बे जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने के प्रस्ताव को सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के साथ ही लंबे समय से चली आ रही स्थानीय मांग पूरी हो गई। इसके साथ ही जलालाबाद नगर पालिका परिषद का नाम भी बदलकर परशुरामपुरी नगर पालिका परिषद किया जाएगा।

कैबिनेट के फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय क्षेत्र की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और जनता की भावनाओं का सम्मान करता है।

प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है और इसका उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों तथा स्थानीय परंपराओं में मिलता है। इसी आधार पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की ओर से लंबे समय से कस्बे का नाम भगवान परशुराम के नाम पर रखने की मांग की जा रही थी।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद ने पूर्व में प्रस्ताव पारित किया था और राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्र सरकार ने 19 अगस्त 2025 को नाम परिवर्तन के लिए अनापत्ति (NOC) प्रदान कर दी थी, जिसके बाद अब राज्य मंत्रिमंडल ने औपचारिक स्वीकृति दे दी है।

सरकार के अनुसार भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है और जलालाबाद क्षेत्र से उनकी जन्मस्थली जुड़ी होने की मान्यता स्थानीय समाज में लंबे समय से प्रचलित है। इसी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए नाम परिवर्तन का निर्णय लिया गया है।

कैबिनेट बैठक में नाम परिवर्तन के अलावा प्रदेश के विकास से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इनमें कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना, नए चिकित्सा संस्थानों का विकास, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना तथा निवेश और स्टार्टअप को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले स्थानों के नामों को उनकी पारंपरिक पहचान के अनुरूप पुनर्स्थापित करने की नीति पर लगातार काम कर रही है। जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किया जाना इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

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