राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: बैंक ने तीन महीने पहले दी थी चेतावनी, ट्रस्ट पदाधिकारियों के हस्तक्षेप से नहीं हटे संदिग्ध गणनाकर्मी

बैंक को लग गई थी चोरी की भनक, की थी गणनाकर्मियों को हटाने की सिफारिश

अयोध्या, 29 जून। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब सामने आया है कि दान राशि में गड़बड़ी की आशंका करीब तीन महीने पहले ही जताई जा चुकी थी। सूत्रों के अनुसार, दान की गणना की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मियों पर संदेह होने के बाद एसबीआई ने उन्हें हटाने की सिफारिश की थी, लेकिन ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के हस्तक्षेप के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। जांच से जुड़े इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, दान गणना का कार्य आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से कराया जा रहा था। अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, रमाशंकर मिश्रा, अवनीश और करुणेश शुक्ला समेत कई कर्मचारी इस व्यवस्था के तहत नियुक्त थे। बताया जा रहा है कि इनमें से कई कर्मी ट्रस्ट पदाधिकारियों के रिश्तेदार या करीबी थे। वेतन बैंक की ओर से दिया जा रहा था, जबकि उनकी नियुक्ति और कार्यप्रणाली को लेकर ट्रस्ट का प्रभाव बना हुआ था।

जांच में यह भी सामने आया है कि एसबीआई के एक अधिकारी को दान गणना प्रक्रिया में अनियमितताओं का संदेह हुआ था। इसी आधार पर उन्होंने लगभग तीन महीने पहले सभी गणनाकर्मियों को बदलने का प्रस्ताव तैयार किया था। बैंक का तर्क था कि लंबे समय से एक ही टीम द्वारा गणना किए जाने से पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है, इसलिए कर्मचारियों का रोटेशन आवश्यक है। इस संबंध में ट्रस्ट को भी जानकारी दी गई थी।

सूत्रों का दावा है कि जैसे ही गणनाकर्मियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, उन्होंने ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों से संपर्क किया। इसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव कथित तौर पर उनके समर्थन में सामने आए और बैंक अधिकारियों से किसी भी कर्मचारी को न हटाने का आग्रह किया। परिणामस्वरूप प्रस्तावित बदलाव लागू नहीं हो सका और वही टीम दान गणना का कार्य करती रही।

जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि उसी समय संदिग्ध कर्मचारियों को बदल दिया गया होता तो कथित चोरी की घटनाओं पर शुरुआती स्तर पर ही रोक लगाई जा सकती थी। कर्मचारियों के न हटने से उनका मनोबल बढ़ा और कथित तौर पर अधिक रकम की हेराफेरी की आशंका भी बढ़ती चली गई।

इस बीच चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर भी सवाल उठ रहे हैं। दोनों ने इस्तीफा सौंप दिया है, लेकिन ट्रस्ट का कहना है कि उस पर अंतिम निर्णय आगामी बैठक में लिया जाएगा। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि इतने संवेदनशील और चर्चित मामले में तत्काल निर्णय लेने के बजाय बैठक का इंतजार क्यों किया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि इससे मामले को समय के साथ शांत करने की कोशिश का संदेश जा रहा है।

गौरतलब है कि चढ़ावा चोरी का मामला सार्वजनिक होने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान प्रबंधन व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब जांच एजेंसियां दान गणना, बैंकिंग प्रक्रिया, रिकॉर्ड प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका सहित पूरे सिस्टम की विस्तृत जांच कर रही हैं। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

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