श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर रुख स्पष्ट करें अखिलेश यादव: हाथरस से सीएम योगी की खुली चुनौती

जो बोली से नहीं माना, वह गोली से जरूर माना - योगी

लखनऊ/हाथरस, 28 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को हाथरस में आयोजित एक जनसभा से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बीच मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश स्वयं को धार्मिक आस्थाओं के प्रति प्रतिबद्ध बताते हैं, तो उन्हें मथुरा और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भी खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या आज करोड़ों रामभक्तों की आस्था, केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रयासों तथा व्यापक विकास कार्यों के कारण विश्वस्तरीय धार्मिक नगरी के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने विपक्ष के उस दावे पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग आज अयोध्या को धार्मिक नगरी बनाने की बात कर रहे हैं, उन्हें पहले अपना राजनीतिक इतिहास देखना चाहिए।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच मथुरा मुद्दे पर सियासत तेज, सपा पर तुष्टिकरण और धार्मिक आस्थाओं की उपेक्षा का आरोप

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “अयोध्या को तो राम भक्तों ने संवार दिया है। अगर सचमुच धार्मिक बनने का प्रयास कर रहे हैं तो मथुरा की बात कीजिए, श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर खुलकर बोलिए। यह भी कहिए कि श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का अभियान चलना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि को भी पूरा सम्मान मिलना चाहिए।”

“अरे, आप क्या धार्मिक नगरी बनाएंगे?”

मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि उनकी सरकार बनी तो अयोध्या को एक आदर्श धार्मिक और पवित्र नगरी के रूप में विकसित किया जाएगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या अपनी पहचान के लिए किसी राजनीतिक दल की मोहताज नहीं है।

उन्होंने कहा, “अरे, आप क्या धार्मिक नगरी बनाएंगे? अपना इतिहास देखिए। रामभक्तों पर गोली आपकी ही सरकार में चली थी। आपने थानों और जेलों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन तक रोक दिए थे। कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाया था। आज वही लोग धार्मिकता का प्रमाण देने की कोशिश कर रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने अयोध्या, काशी और मथुरा के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विकास के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, आधारभूत ढांचे के विस्तार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही है।

सपा पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप

योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष के पास प्रदेश के विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का कोई स्पष्ट एजेंडा नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली को भी वही सम्मान मिलना चाहिए जिसके लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन, सड़क, बिजली, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार के लिए अनेक परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिली है।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद की पृष्ठभूमि में बढ़ी राजनीतिक तल्खी

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला प्रदेश की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच जारी है और कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं।

शनिवार को आजमगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर के दान से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद सरकार को दबाव में आकर एसआईटी गठित करनी पड़ी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि एसआईटी की रिपोर्ट एक विशेष व्यक्ति को ही क्यों सौंपी गई।

अखिलेश यादव ने कहा था कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो अयोध्या को धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक विकसित किया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान में कथित गड़बड़ियां अत्यंत चिंताजनक हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सरकार ने दोहराया—दोषियों को नहीं मिलेगी राहत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार शुरू से ही इस मामले की निष्पक्ष जांच के पक्ष में रही है। उन्होंने दोहराया कि एसआईटी स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाओं को राजनीतिक हथियार बनाने के बजाय सभी पक्षों को जांच प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए और यदि किसी के पास कोई ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।

राजनीतिक तापमान बढ़ने के संकेत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और धार्मिक विरासत को लेकर बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। एक ओर भाजपा इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण का मुद्दा बता रही है, वहीं विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा मामले की निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग पर कायम है।

आने वाले दिनों में एसआईटी की जांच, राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण और श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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