आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार : राष्ट्रपति मुर्मू

जबलपुर, 21 जून 2026। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की पवित्रता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से ही देश का संतुलित एवं समावेशी विकास संभव है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करना भी है।

राष्ट्रपति रविवार को रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती त्याग, परिश्रम, साहस और बलिदान की प्रतिमूर्ति थीं तथा नारी शक्ति के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत हैं। उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रसेवा की प्रेरणा भी प्रदान करता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विकास की दौड़ में पीछे छूटे लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों और युवाओं को आधुनिक विकास प्रक्रिया का सहभागी बनाने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव भी विकसित किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है और भारत की सबसे बड़ी ताकत भी यही युवा शक्ति है। युवाओं में कुछ भी कर गुजरने का साहस और क्षमता है, इसलिए देश को उनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार और अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह महिला सशक्तिकरण और देश के सर्वांगीण विकास का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में हमारी जीवनशैली, रहन-सहन और वेशभूषा में परिवर्तन स्वाभाविक है, लेकिन हमें अपने मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा जैसे भारतीय जीवन-मूल्य मानव चेतना की आधारशिला हैं। इन मूल्यों को अपनाकर युवा कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति ने युवाओं से अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे ग्रामीण और वंचित समुदायों की समस्याओं को समझें तथा उनके समाधान विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब युवा अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए करेंगे।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। युवाओं को पर्यावरण के प्रति सजग रहकर सतत विकास की दिशा में योगदान देना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

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