वोट देने के अधिकार को मिले मौलिक अधिकार का दर्जाः कांग्रेस

कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश

नई दिल्ली, 21 जून 2026। कांग्रेस ने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिए जाने की जोरदार वकालत करते हुए कहा है कि इससे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने या उन्हें कथित रूप से अयोग्य ठहराए जाने जैसी स्थितियों के खिलाफ मजबूत संवैधानिक सुरक्षा मिल सकेगी।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि अब समय आ गया है कि मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया जाए, ताकि इसे सर्वोच्च स्तर की न्यायिक सुरक्षा और समीक्षा प्राप्त हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग का कामकाज पक्षपातपूर्ण दिखाई दे रहा है और ऐसे में मताधिकार को अधिक संवैधानिक संरक्षण देने की आवश्यकता है।

रमेश ने कहा कि हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकारों के दायरे में माना है। ऐसे में मतदान के अधिकार को भी मौलिक अधिकार बनाने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र की मजबूती का आधार नागरिकों का मतदान अधिकार ही है।

उन्होंने बताया कि संविधान सभा में भी इस विषय पर व्यापक चर्चा हुई थी। उनके अनुसार, भीमराव आंबेडकर और जगजीवन राम ने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने का समर्थन किया था, जबकि वल्लभभाई पटेल और सी. राजगोपालाचारी सहित कुछ नेताओं का मानना था कि संविधान में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रावधान पर्याप्त होगा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की व्यवस्था की गई है, लेकिन पिछले सात दशकों से यह बहस जारी है कि मतदान का अधिकार केवल वैधानिक अधिकार है या इसे मौलिक अधिकार माना जाना चाहिए।

रमेश ने मार्च 2023 में आए अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस फैसले में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी ने अपनी असहमति वाली राय में मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार माना था। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले ही मतदाताओं को उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि, वित्तीय हितों और राजनीतिक चंदे के स्रोतों की जानकारी पाने का संवैधानिक अधिकार दे चुका है तथा मत की गोपनीयता और नोटा (NOTA) के अधिकार को भी मान्यता दे चुका है।

कांग्रेस का कहना है कि जब मतदान से जुड़े अन्य अधिकारों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है, तब स्वयं मतदान के अधिकार को केवल वैधानिक अधिकार बनाए रखना उचित नहीं है। पार्टी का मानना है कि इसे मौलिक अधिकार का दर्जा मिलने से निर्वाचन आयोग के कार्यों पर न्यायिक निगरानी और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में उच्चतम न्यायालय की न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि सीमांकित फुटपाथ पर चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) और अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। इसी संदर्भ में कांग्रेस ने मतदान के अधिकार को भी मौलिक अधिकार घोषित करने की मांग दोहराई है।

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